बिस्मिल-अशफ़ाक़ की साझी कुर्बानियों की अमूल्य विरासत को सहेजना आज के वक़्त की जरूरत | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

बिस्मिल-अशफ़ाक़ की साझी कुर्बानियों की अमूल्य विरासत को सहेजना आज के वक़्त की जरूरत | New India Times

काकोरी के अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह व राजेंद्र लाहिड़ी की शहादत को याद करते हुए छात्र संगठन एआईडीएसओ, युवा संगठन एआईडीवाईओ, महिला संगठन एआईएमएसएस के द्वारा साझी शहादत साझी- विरासत यादगार सप्ताह का आयोजन 13-19 दिसम्बर तक अलग अलग स्थानों पर किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत 18 दिसंबर को जहांगीराबाद स्थित नीलम पार्क में एक सांस्कृतिक सभा का आयोजन किया गया कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों व बिस्मिल अशफाक की लिखी गजलों को पढ़ा गया। साथ ही साथ काकोरी के क्रांतिकारियों के जीवन संघर्ष पर भी प्रकाश डाला गया।

बिस्मिल-अशफ़ाक़ की साझी कुर्बानियों की अमूल्य विरासत को सहेजना आज के वक़्त की जरूरत | New India Times

कार्यक्रम में बात रखते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री विनोद लाेगारिया ने कहा की बिस्मिल-अशफाक की कुर्बानी आजादी आंदोलन में दोस्ती की अमूल्य मिसाल है। उस समय में जब अंग्रेज समाज को जात-धर्म में बांटकर अपनी शोषणकारी नीतियों को भारत पर थोप रहे थे व देश के अंदर सामाजिक एकता को कमजोर कर रहे थे तब बिस्मिल-अशफाक ने साथ में मिलकर न सिर्फ आजादी की लड़ाई लड़ी बल्कि फांसी के तख्ते तक का सफर साथ में तय किया। ऐसी दोस्ती अमूल्य है और इसके उदाहरण आज समाज में पेश करने की जरूरत है।

बिस्मिल-अशफ़ाक़ की साझी कुर्बानियों की अमूल्य विरासत को सहेजना आज के वक़्त की जरूरत | New India Times

आज जब समाज पर एक के बाद एक नैतिकता के हमले हो रहे हैं, शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतें आमजन से दूर हो गए हैं और लोग सवाल न करें इसीलिए उन्हें जाति धर्म में बांटकर उनके बीच नफरत फैलाई जा रही है तब बिस्मिल, अशफाक, राजेंद्र लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह आदि का जीवन संघर्ष छात्रों नौजवानों के बीच एक बेहतर विचार को स्थापित करेगा ऐसा हमारा मानना है। इसी उद्देश्य के साथ यह कार्यक्रम किया गया है। कार्यक्रम को एआईडीवाययो के साथी सोनू सेन ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन श्याम शाक्य ने किया एवं कार्यक्रम में अंबिका, सोनू सेन, पूजा जायसवाल, ज्योतिका, शिवानी आदि ने गीतों की प्रस्तुतियां दी।

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