यादगार रहा दशहरा मेला का कुलहिन्द मुशायरा | New India Times

वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

यादगार रहा दशहरा मेला का कुलहिन्द मुशायरा | New India Times

दशहरा मेला के सांस्कृतिक मंच पर मंगलवार की रात कुल हिन्द मुशायरा, लोगों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ गया।देश के कोने-कोने से आए नामचीन शायरों के साथ जिले के शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। मुशायरे के मुख्य आकर्षण टीवी के कपिल शर्मा शो में शेर पढ़ने वाले, इकबाल अज़हर के अलावा मंच पर अज़्म शाकरी, रामप्रकाश बेखुद तथा जमुना प्रसाद उपाध्याय, ज़ीशान चमन जैसे शायरों ने रात भर सामयीन को बांधे रखा। तीन बजे, तक चले इस मुशायरे में सुल्तान अपनी फरमाइशी ग़ज़लें भी शायरों से सुनी।मुशायरे की शुरुआत कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री रह चुके पूर्व सांसद जफर अली नकवी तथा लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मो.हैदर ने दीप प्रज्वलन करके की।इस मौके पर जहां अध्यक्षता कर रहे, ज़फर अली नकवी ने मुशायरे को कौमी एकता का सबसे बड़ा माध्यम बताया, वहीं मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सैय्यद मो.हैदर रिजवी को भी नगर पालिका अध्यक्ष डा.इरा श्रीवास्तव ने प्रतीक चिन्ह व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर मो0 हैदर रिजवी ने कहा कि मुशायरों की महफ़िल में गंगा जमुनी तहज़ीब देखने को मिलती हैं। मुल्क में सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए।

यादगार रहा दशहरा मेला का कुलहिन्द मुशायरा | New India Times

ये किए गए सम्मानित

राम मोहन गुप्त के संचालन में समाज सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सौरभ गुप्ता, डा. रूपक टंडन, डा.संजीव भल्ला, देव जुनेजा व बुजुर्ग शायर कादिर लखीमपुरी के साथ हकीम मंजूर हुसैन खां सागर के पुत्र शकील खान को भी सम्मानित किया गया। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष डा.इरा श्रीवास्तव, ईओ संजय कुमार व मेला अधिकारी अमरदीप मौर्य, समेत कई लोग मौजूद रहे।
इसके बाद कासगंज से आए शायर नदीम फर्रुख के संचालन में, मुशायरे की शुरुआत दिल्ली से ज़ीशान चमन ने नातिया कलाम पढ़कर की। इसके अलावा उन्होंने पढ़ा, 

“यह मुल्क किस तरह से बढ़े इसपे ध्यान दें,
आंच आए गर वतन पे लुटा अपनी जान दें ” 
रुड़की से आए अलीम वाजिद ने पढ़ा
इज्जत तलाश करते हैं मेंयार देख कर कितने अमीर हो गए किरदार बेंचकर।

मुशायरे के सबसे ज्यादा आकर्षण रहे अजहर इकबाल को लोगों ने बार-बार सुना उन्होंने पढ़ा 

हर तरफ घात में बैठे हैं यहां दुशासन, वीर अर्जुन सा लड़इया नहीं आने वाला। 

खुद तुम्हें दुर्गा के अवतार में ढलना होगा
घोर कलयुग है कन्हैया नहीं आने वाला। 
संचालन कर रहे नदीम फर्रुख ने पढ़ा
कुछ इस तरह से जमाने पर छा जाना चाहता है,
वो आफताब पे पहरे बिठाना चाहता है। 
चटक रहा है जो रह-रह के मेरे सीने में, ये मुझमें कौन है जो टूट जाना चाहता है। 
इसके अलावा तारिक बहराइची के गीत बहुत सराहे गए। 
अयोध्या से आए जमुना प्रसाद उपाध्याय की पंक्तियां खूब सराही गईं, अगर गुंडे सियासत में न जाएं तो कहां जाएं, इसके अलावा अज़्म शाकरी ने पढ़ा जहर भी लग गया दवा बनाकर हमने खाया था खुदकुशी के लिए।

मुशायरे के कन्वीनर विकास सहाय के शेर भी खूब सुने गए उन्होंने पढ़ा 

कली में तेरी नजाकत दिखाई देती है
तेरी ही फूल में नकहत दिखाई देती है।
दिल्ली से आए वसीम जहांगीराबादी ने पढ़ा,
लिबास होते हुए भी वो बे लिबास रहे। पतंगे जितने चरागों के आसपास रहे।

अमित कैथवार ने पढ़ा, 
हमारे जिस्म का कोई भी हिस्सा काट कर देखो, हमारे जिस्म की नस-नस में हिंदुस्तान बसता है, विशेष शर्मा व कादिर लखीमपुरी की रचनाओं पर लोग ठहाके भी लगाते रहे। कुलदीप समर के मुक्तक भी खूब सराहे गए। जितेश राज नक्श ने जब पढ़ा की दुकान जिसमें यादों की सजी है मैं उसे मेले में खोना चाहता हूं तो लोग वाह वाह करने से नहीं रुक सके। इसके अलावा शायरों ने रात भर मुशायरे में श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इसके अलावा इकबाल अकरम वारसी लखनऊ के वकार काशिफ, करनाल हरियाणा से आईं, विनीता चोपड़ा, निकहत मुरादाबादी,व चांदनी शबनम, शरीफ शाहबाज घाटमपुर, खलील फरीदी रायबरेली ज्ञान प्रकाश आकुल, कुलदीप समर इकबाल अकरम समेत कई शायरों ने अपने कलाम पेश किए।

सेल्फी के लिए कई बार घेरे गए इकबाल अजहर

देश के जाने माने शायर इकबाल अज़हर के साथ सेल्फी लेने का सिलसिला पूरी रात जारी रहा। इस दौरान वे अपने चहेतों द्वारा कई बार घेरे गए। करीब नौ बजे मंच पर पहुंचे अजहर इकबाल के साथ जहां शायरों ने कई बार सेल्फी करवाई, वहीं मंच पर श्रोताओं ने भी चढ़कर उन्हें घेर लिया, घंटे सेल्फी का दौर चला इसके बाद जब उतर कर अपने घर के लिए जाने लगे तो सड़क पर उन्हें आम जनमानस ने घेर लिया और लोग सेल्फी लेने लगे बाद में पुलिस बल भेजने पर उन्हें किसी तरह लोगों से अलग कर भेजा जा सका। 

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