"गौरी लंकेश तेरी बहादुरी और निष्पक्षता को सलाम, गांधी से शुरू होकर दाभोलकर, पनसारे, कालबुर्गी से होते हुए अब गौरी लंकेश": सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी | New India Times

Edited by Arshad Aabdi; झांसी ( यूपी ), NIT; ​​"गौरी लंकेश तेरी बहादुरी और निष्पक्षता को सलाम, गांधी से शुरू होकर दाभोलकर, पनसारे, कालबुर्गी से होते हुए अब गौरी लंकेश": सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी | New India Times

गौरी लंकेश तेरी बहादुरी और निष्पक्षता को सलाम।गांधी से शुरू होकर दाभोलकर, पनसारे, कालबुर्गी से होते हुए अब गौरी लंकेश।

हत्यारों के गिरोह का

"गौरी लंकेश तेरी बहादुरी और निष्पक्षता को सलाम, गांधी से शुरू होकर दाभोलकर, पनसारे, कालबुर्गी से होते हुए अब गौरी लंकेश": सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी | New India Times​एक सदस्य हत्या करता है। दूसरा उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताता है। तीसरा मारे गए आदमी के दोष गिनाता है।चौथा हत्या का औचित्य ठहराता है।पांचवां समर्थन में सिर हिलाता है और अन्त में सब मिलकर बैठक करते हैं, अगली हत्या की योजना के सम्बन्ध में।

वाह रे, देश का लोकतंत्र और उसमें फासिस्टवादियों की आज़ादी।​
"गौरी लंकेश तेरी बहादुरी और निष्पक्षता को सलाम, गांधी से शुरू होकर दाभोलकर, पनसारे, कालबुर्गी से होते हुए अब गौरी लंकेश": सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी | New India Times

गौरी लंकेश जैसे सहाफियों (पत्रकारों) को समर्पित

“हम न तलवार, न बंदूक़, न बम रखते हैं,
ज़ुल्म यूं डरता है हमसे, के क़लम रखते हैं।
जान जाती है कई बार क़लम चलने से,
वो क़लम फेंक दें, जो हौसला कम रखते हैं।”
गौरी लंकेश के कन्नड भाषा में लिखे अंतिम लेख का हिन्दी अनुवाद ज़रुर पढ़ें। ताकि देश के लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी और साझा संस्कृति के विरुद्ध हो रही साज़िशों से आगाह हो सकें।
जागो भारतवासियो जागो।

सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी,  समाजवादी चिंतक-झांसी

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