मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

ज़िले की कर्मठ, लगनशील, इरादे की पक्की और सजग कद्दावर नेत्री एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के जहन में सिर्फ एक ही धुन सवार रहती है और वो बुरहानपुर के किसानों का चौमुखी विकास। 2003 में बुरहानपुर जिले के नेपानगर की विधायक होकर उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र सहित संपूर्ण बुरहानपुर जिले के लिए कृषि, बिजली, सिंचाई और सड़क सहित विकास के हर क्षेत्र का रोडमैप अपनी दूरदर्शीता वाली सोच से तैयार ही नहीं कराया वरन् उसके क्रियान्वयन में भी जुट गई। फलस्वरूप श्रीमती चिटनिस ने बुरहानपुर को प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल किया है। अपने अंचल में रहने वाले किसानों के हर सुख-दुख में भागीदार बनने वाली श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अपने कार्यकाल में किसानों के लिए कृषि भूमि की सिंचाई का ही नहीं वरन् आपदा आने पर किसान के लिए शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार से मुआवजा राशि में 100 गुना की वृद्धि तक कराई।
अपने मंत्रीत्व कार्यकाल में श्रीमती अर्चना चिटनिस किसानों के लिए हर कदम पर साथ खड़ी रही। कृषि संगोष्ठिया, कार्यशालाओं एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विशेषज्ञयों को बुरहानपुर लाकर सभी क्षेत्र के किसानों से रूबरू कराती रही है। जिससे कृषि एवं उद्यानिकी फसलों का रकबा वर्ष 2007-08 में 84760 हेक्टयर था जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 1 लाख 16 हजार 521 हेक्टेयर हो गया। जिससे 31761 हेक्टेयर उद्यानिकी एवं कृषि फसलों का रकबा बढ़ा। नवीन बीजों की उपलब्धता वर्ष 2007-08 में 29.37 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 तक 59.60 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। उर्वरक उपलब्धता वर्ष 2007-08 में 289.55 किलो ग्राम प्रति हेक्टयर से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 तक 447.206 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर उपलब्धता में वृद्धि कराई गई। किसान क्रेडिट कार्ड संख्या वर्ष 2007-08 में 11 हजार 500 से थी जिसे बढ़ाकर वर्ष 2017-18 तक 52648 की वृद्धि कराई गई। किन्तु वर्तमान में फसल ऋण माफी की प्रत्याशा में 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हुए है। वहीं वर्ष 2017-18 में समर्थन मूल्य पर 21 हजार 525 क्विटंल तुवर खरीदी कर 783 कृषकों को राशी 10.87 करोड़ रूपए का भुगतान कराया गया।
ग्राम भावसा के कृषक इंदरसिंह रामदास पाटिल, ग्राम बंभाड़ा के शांताराम चौधरी एवं खामनी के कृषक समाधान रामकृष्ण पाटिल ने बताया कि सिंचाई, जल तथा माइक्रो ईरीगेशन की उपलब्धता के कारण वर्ष 2017-18 तक 32 हजार हेक्टयर में कृषि तथा उद्यानिकी फसलों में माइक्रो इरीगेशन का रकबा बढ़ा। जबकि वर्ष 2007-08 से पहले लगभग 10 हजार हेक्टेयर में माइक्रो इरीगेशन रकबा संचालित था। माइक्रो इरीगेशन की उपलब्धता के कारण कम मात्रा में रासायनिक खाद (पानी में घुलनशील रासायनिक खाद) फर्टीगेशन के द्वारा फसलों को दिया जाने लगा जिससे गुणवत्ता और उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई। समय-समय पर देश के कृषि विशेषज्ञों को बुलाकर विभिन्न फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता अधिक से अधिक कैसे बढ़े और किसानों की आय दोगुनी कैसे हो इस हेतु किसानों के प्रषिक्षण कार्यक्रम कराए। किसानों को जागरूक करने में श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अहम भूमिका निभाई, जिसके लिए उनका साधुवाद। जिस प्रकार किसानों के प्रति श्रीमती अर्चना चटनी दीदी ने सदैव एक जुनून और जज़्बा दिखाया है। इस तरह बुनकरों की प्रति भी अगर वे जी जान से प्रयास करें तो बुनकरों का भी उत्थान संभव है।
