इदरीस मंसूरी, गुना (मप्र), NIT:

भोपाल से गुना की आने वाली कमला ट्रेवल्स की दोपहर एक बजे नादरा बस स्टैंड से चलने वाली बस में मिली भगत से मनमाना किराया वसूलने का काम इन्हीं के एजेन्टों द्वारा किया जा रहा है, यह पूछने पर कि पार्वती खटकिया तिराहे का किराया तो गुना से कम होना चाहिये तो इस पर इनके ही एजेंट का कहना था कि 300 रुपये ही लगेंगे वर्ना गाड़ी में पैर भी मत रखना। बता दें कि कल शनिवार को भोपाल में बारिश होने कारण और कमला बस की गुणवत्ता के कारण इसमें बैठने की इच्छा हमारे पत्रकार साथी राजेंद्र सेन जी की हुई ऊपर से इस समय कोई दूसरी बस उपलब्ध नहीं थी। यात्रियों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए दो सवारी का किराया 600 रुपये देना पड़ा। इसके बाद बस के कण्डक्टर बृजेश नामक ने दूसरा टिकट दिया जिस पर 500 रुपये लिखे हुए हैं। जब इनसे कहा कि हमनें 600 रुपये दिऐ हैं तो आप 500 की रसीद क्यों दे रहे हो तब इनका कहना था कि आप किसी को भी कितना ही पैसा देदो इसकी मेरी जवाबदारी नहीं है। इस पर पत्रकार ने कहा कि जब आपके एजेंट द्वारा टिकट देदी है तो आप दूसरा टिकट क्यों दे रहे हो और इनके द्वारा बुक किऐ टिकट को आपके द्वारा वैधानिक मानकर यात्री को गन्तव्य तक जाने स्वीकृति कैसे दे रहे हो…? इसका मतलब हुआ कि टिकट के दलालों ने जो कुछ किया है वो सब जायज है तो यह आपकी मिली भगत ही तो कहलाएगी। वर्ना आप कहते कि गाडी के मालिक हम हैं तो टिकट भी हम ही देंगें।
यह वाकया तब हुआ जब बस शहर से बाहर निकल आई।जबकि अन्य यात्रियों ने सारी बातें कण्डक्टर को स्टेण्ड से बस चलने के पूर्व बता दी थी। इसके बाद भी कण्डक्टर की चुप्पी यात्रियों के सन्देह को बढ़ावा देती है। जबकि होना यह चाहिए था कि यात्रियों के सामने उस संदिग्ध एजेंट से बात करना था कि… तूने इतने पैसे हमारी स्वीकृति के बिना कैसे लिए और टिकट कमला बस का चलेगा कि तेरा…? लेकिन ऐसा कुछ नहीं होना ही कई सवाल खड़े करता है। इस बस में न तो किराया सूची लगी थी और न ही कण्डक्टर वर्दी में था आदि।
आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं जब एक पत्रकार से मनमाना किराया वसूला जा सकता है तो आम यात्रियों का क्या हाल होगा?
इन्होंने यह भी कहा कि खटकिया पार्वती के नाम से हमारा कोई स्टापेज नहीं है टिकट तो गुना का ही लेना पड़ेगा जबकि यही बस जब गुना से भोपाल की ओर जाती है तो कितनी ही बार खटकिया से चिल्ला चिल्ला कर, ढूंढ ढूंढ कर सवारी बैठाते नजर आए हैं। तकरीबन 180 किमी की दूरी का मनमाना किराया लेकर भी यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाना इन्हें बखूबी आता है। इस बस पर लिखे मोबाइल नंबर पर घन्टी कर बस मालिक को स्थिति पर बात करने की कोशिश की गई किन्तु यह नम्बर व्यस्त भी आया, अस्थायी रूप से बन्द भी बताया और कभी घन्टी बजी भी तो किसी ने फोन उठाकर बात नहीं की।
यह वाकया ऊँची दुकान फीके पकवान की लोकोक्ति को भी चरितार्थ करता है क्योंकि लोगों के मन में कमला बस के प्रति इसलिए सहानुभूति है कि इसका अपना एक अलग स्थान है।
