जुन्नारदेव को जिला बनाओ की मांग हुई तेज, कलेक्ट्रेट कार्यालय को दिया गया मांग पत्र | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव को जिला बनाओ की मांग हुई तेज, कलेक्ट्रेट कार्यालय को दिया गया मांग पत्र | New India Times

कन्हान बचाओ मंच द्वारा जुन्नारदेव को जिला बनाने की मांग की कलेक्ट्रेट कार्यालय में मांग पत्र दिया गया है जिस में उल्लेख है कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा और आदिवासी अंचल है और आदिवासी सीट है। जुन्नारदेव निर्देशांक 22.2N 7858E पर स्थित है तथा समुद्ध तल से 748 मी. पर है जुन्नारदेव सतपुड़ा पर्वत माला की पहाड़ियों और जंगल के निकट बसा है। इसकी सीमाएं लगभग 110 वर्ग कि.मी. के दायरे में फैलकर बैतुल, नर्मदापुरम्, नरसिंहपुर आदि जिलो की छुती है। यहां बिजली विभाग के कार्यालय, शासकीय महाविधालय राजस्व न्यायलय सिबिल न्यायलय, खनिज, वनोपज कृषि उपज मंडिया, कोयला खदाने आदि है।

वर्तमान में जुन्नारदेव छिन्दवाड़ा जिले में आता है। जिला स्तरीय शासकीय हेतु आल्मोद, सांगाखेडा, बाटरी, बाकोडी, बिदुई, साजवा, रामपुर आदि क्षेत्रों से जिला मुख्यालय पहुंचानें में 100 किमी से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। जो आमजन के जिए काफी कष्टप्रद होती है। जुन्नारदेव बैतुल एवं छिन्दवाड़ा के मध्य में आता है। जुन्नारदेव को जिला बनाकर इस समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है। परासिया, दमुआ, उमरेठ, चान्दामेटा, तामिया, माहुलीसर, नवेगांव, रामपुर, डुंगरिया जैसे बड़े थाने में मिलकर क्षेत्रफल की दृष्टि से बेहतर जुन्नारदेव जिला बनाया सकता है। यहाँ जुन्नारदेव और परासिया में सिविल कोर्ट पहले से कार्यशील हैं तथा तामिया सिविल कोर्ट भी अस्तित्व में आ चुका है।

जुन्नारदेव को जिला बनाकर दूर दराव क्षेत्र की जनता को बेहतर व सुलभ स्वास्थ सुविधा प्रदान की जा सकती है। जुन्नारदेव को जिला बनाकर क्षेत्र के आदिवासियों तक शासकीय योजनाओ का लाभ पहुंचाना सरल हो जायेगा जुन्नारदेव क्षेत्र में शासकीय विभाग के अन्य मुख्यालयों के खुलने से क्षेत्र के व्यापार पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। विशेषता जुन्नारदेव क्षेत्र की जनता अपनी पूर्ववर्ती मांगो को पूरा न होते देख अपने को ठगा सा महसूस करते हैं।

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One thought on “जुन्नारदेव को जिला बनाओ की मांग हुई तेज, कलेक्ट्रेट कार्यालय को दिया गया मांग पत्र”
  1. जय जुन्नारदेव जुन्नारदेव को जिला बनाकर यहां की व्यवस्था को व्यवस्थित करना ही हमारा उद्देश्य है ताकि हमारे यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो सके रोजगार के साधन बनेंगे और आदिवासी क्षेत्र होने के कारण आदिवासी भाइयों को भी फायदा पहुंचेगा

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