नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कोई सरकारी इमारत तैयार होने के बाद कितने दिन के भीतर सेवारत हो सकती है इसका फैसला प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले निर्माण पूर्णता दाखिले से होता है। आज से तीन साल पहले जामनेर उपजिला अस्पताल में NRHM की ओर से नींव रखी गई, नेत्र चिकित्सा विभाग की बिल्डिंग बनकर पूरी हो चुकी है लेकिन उसका लोकार्पण नहीं किया जा रहा है। इस इमारत के घटिया निर्माण को लेकर NIT ने तकनिकी तथ्यों को आधार बनाते हुए लगातार चार स्टोरी की। डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बनी इस इमारत का आज हमने मुआयना किया तो पता चला कि बिल्डिंग की छत कई कोनों से टपक रही है। छत के ऊपर जमा होने वाले बारिश के पानी का आउटलेट सिस्टम फेल है, निर्माण के दौरान छत को पानी ही नहीं दिया गया, उसमें इस्तेमाल किया गया सीमेंट घटिया किस्म का था, बिल्डिंग के चारों ओर सीमेंट कांक्रीट की पिचिंग कर दी है ताकि इमारत की बुनियाद दिखाई नहीं पड़े।

सहयोगी पत्रकार राहुल ने बताया कि इस काम का पैसा अभी तक ठेकेदार को पे नहीं किया गया है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक यह इमारत हैवी रैन बर्दाश्त नहीं कर सकती, अगर लगातार आठ दिन बारिश की झड़ी शुरू रही तो इसकी छत धड़ाम से गिर जाएगी। जब तक इस पूरे बिल्डिंग का टेक्निकल ऑडिट नहीं किया जाता तब तक इसे कार्यान्वित नहीं किया जाएगा।

दूसरा मसला खड़की गांव से है, यहां पंचायत समिति के B&C ने 15 वें वित्त आयोग से कंक्रिट सड़क बनाई जो बारिश के पानी से एक हफ्ते में उखड़ गई। हमने पूछताछ की तो JE तिवारी ने रिपेयरिंग की बात कहकर फोन काट दिया। यह सब अमृतकाल का महिमा है। सरकार में शामिल मंत्री गिरीश महाजन के निर्वाचन क्षेत्र का यह हाल है तो इससे आप राज्य के विकास को नाप सकते हैंं। लाइट, रोलिंग, कैमरा एंड ऐक्शन इस तरह पेड़ न्यूज फैक्टरी द्वारा खेले जाने वाले लीडर मैनेजमेंट के इस खेल ने तीन पीढियां बर्बाद कर दी हैं।
