सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित एक मामले में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, तत्कालीन रेलवे जीएम, निजी व्यक्तियों आदि सहित 17 आरोपियों के विरुद्ध दूसरा आरोप पत्र किया दायर | New India Times

अतीश दीपंकर, ब्योरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित एक मामले में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, तत्कालीन रेलवे जीएम, निजी व्यक्तियों आदि सहित 17 आरोपियों के विरुद्ध दूसरा आरोप पत्र किया दायर | New India Times

सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित एक मामले में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के तत्कालीन जीएम, डब्ल्यूसीआर के दो सीपीओ, निजी व्यक्तियों, निजी कंपनी आदि सहित 17 आरोपियों के विरुद्ध आज दिल्ली की नामित अदालत में दूसरा आरोप पत्र दायर किया है।

सीबीआई ने 18 मई 2022 को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री और उनकी पत्नी, 2 बेटियों एवं अज्ञात लोक सेवकों तथा निजी व्यक्तियों सहित 15 अन्यों के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। आरोप है कि वर्ष 2004-2009 की अवधि के दौरान तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री ने रेलवे के अलग अलग जोनों में समूह “डी” पद पर अलग-अलग पदों पर स्थानापन्नों की नियुक्ति के बदले में अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर भूमि संपत्ति के हस्तांतरण आदि के रूप में आर्थिक लाभ प्राप्त किया था। आगे आरोप था कि इसके बदले में स्थानापन्न जो पटना के निवासी थे, स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से उक्त मंत्री के परिवार के सदस्यों एवं उनके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित एक निजी कंपनी, जो उक्त परिवार के सदस्यों के नाम पर ऐसी अचल संपत्तियों के हस्तांतरण में भी शामिल थी। पक्ष में पटना स्थित अपनी जमीन बेची एवं उपहार में दे दी। यह भी आरोप है कि जोनल रेलवे में स्थानापन्न की ऐसी नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन या कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई थी, फिर भी जो नियुक्त व्यक्ति पटना के निवासी थे, उन्हें मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर एवं हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में स्थानापन्न के रूप में नियुक्त किया गया था।

पूर्व में दिल्ली एवं बिहार आदि सहित कई स्थानों पर तलाशी ली गई थी। जांच के दौरान, यह पाया गया कि तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री ने उन स्थानों पर स्थित भूखंड का अधिग्रहण करने के इरादे से, जहां उनके परिवार के पास पहले से ही भूखंड थें या जो स्थान पहले से ही उनसे संबंधित थें, उन्होंने सहयोगियों एवं परिवार के सदस्यों के साथ षड़यंत्र किया और कथित तौर पर रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी की पेशकश/प्रदान करके विभिन्न भूमि मालिकों की जमीन हड़पने की योजना बनाई।

आरोपी ने कथित तौर पर सहयोगियों के माध्यम से ऐसे उम्मीदवारों के आवेदन एवं दस्तावेज एकत्र किए और फिर उन्हें रेलवे में भर्ती प्रक्रिया करने तथा नौकरियां प्रदान करने हेतु पश्चिम मध्य रेलवे को भेजा था और आरोपी के प्रभाव/नियंत्रण में पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधकों ने उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए मंजूरी दे दी थी।

रेलवे में नौकरियां प्रदान करने के लिए, उन्होंने कथित तौर पर एक अप्रत्यक्ष तरीका तैयार किया, जिसमें उम्मीदवारों को पहले स्थानापन्न के रूप में नियुक्त किया गया और बाद में नियमित कर दिया गया। तलाशी के दौरान एक हार्ड डिस्क भी बरामद की गई थी जिसमें उम्मीदवारों (जो स्थानपन्न के रूप में कार्यरत थें) की सूची थी।

यह भी आरोप है कि वर्ष 2007 के दौरान एक निजी कंपनी के नाम पर 10.83 लाख रु. में एक भूखंड खरीदा गया था और बाद में, उक्त भूमि के साथ-साथ उक्त कंपनी द्वारा खरीदे गए कुछ अन्य भूखंड को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री की पत्नी और बेटे के स्वामित्व/नियंत्रण में केवल एक लाख रु. में शेयरों के हस्तांतरण के माध्यम से खरीद गया था। हस्तांतरण के समय, कंपनी के पास कथित तौर पर 1.77 करोड़ रु. (लगभग) की कुल लागत पर खरीदे गए भूखंड का स्वामित्व था एवं इसे केवल 1 लाख रु. (लगभग) में हस्तांतरित किया गया था।

हालांकि, भूमि का बाजार मूल्य बहुत अधिक था।

इससे पूर्व 7 अक्टूबर 22 को 16 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया गया था। इस मामले में जांच जारी है।

जनमानस को याद रहे कि उपर्युक्त निष्कर्ष सीबीआई द्वारा की गई जांच एवं उसके द्वारा एकत्र किए गए सबूतों पर आधारित हैं।

भारतीय कानून के तहत, आरोपियों को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि निष्पक्ष सुनवाई पश्चात उनका अपराध सिद्ध नहीं हो जाता।

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