नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सितंबर 2022 मे शिंदे-फडणवीस सरकार ने जलगांव जिले के PWD विभाग के लिए महज 29 करोड़ रुपए रिलीज किए जबकि 300 करोड़ की आवश्यकता थी, तब शासकीय ठेकेदार संगठन ने मंत्रालय जा कर संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर लंबित भुगतान के लिए अनुरोध किया। इसके पहले संगठन ने फंड के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाया था। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लोकार्पण समारोह के औचित्य से महाराष्ट्र के ठेकेदारों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में डेरा डाले हुए है, यह प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओ से मिलकर राज्य सरकार और ठेकेदारों के बीच देनदारी को लेकर पैदा हुई वित्तीय समस्या पर समाधान की मांग करने की मंशा से दिल्ली में मौजूद है।
ज्ञात हो कि राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली में हैं। निर्माण क्षेत्र को लेकर एक और खबर यह है कि बीते एक साल से इस सेक्टर का एक लाख करोड़ रुपया सरकार की तरफ बकाया है। उद्धव ठाकरे सरकार के समय केंद्र सरकार से महाराष्ट्र को GST का 25 हजार करोड़ रुपया आना था जिसका अब तक अता-पता नहीं है। 11 नवंबर 2022 को New India Time’s ने ठेकेदारों के मसले को लेकर एक स्टोरी की थी।
सरकार बनी भाजपा के गले की हड्डी
जून 2022 में जोड़तोड़ से बनाई गई शिंदे-फडणवीस सरकार की संवैधानिक वैधता को लेकर कानूनी हलकों में शुरू से संदेह था। 11 महीने बाद देश की शीर्ष अदालत ने इस सरकार को असंवैधानिक करार दे दिया।अवैध सरकार को किसी भी प्रकार का वित्तीय, नीतिगत, संवैधानिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं है, नतीजा यह है कि 11 महीनों के दौरान शासन में जितनी भी वित्तीय अनियमितताएं पैदा हुईं उसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है। राजनीतिक रूप से शिंदे सरकार भाजपा के गले की हड्डी बन चुकी है। कर्नाटक में चालीस पर्सेंट कमीशन वाला आरोप भाजपा को ले डूबा, महाराष्ट्र में ठेकेदारों का सरकार पर लाखों करोड़ रूपयों का बकाया भाजपा के लिए आने वाले चुनावों में मुसीबत खड़ी कर सकता है।
