नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

30 अप्रैल की शाम 8 बजे जामनेर में आए चक्रवाती तूफान के कारण शहर में सारी की सारी बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई। बीते तीन दिनों से जामनेर समेत आसपास के कुछ गांवों में बत्ती गुल है। महज 20 मिनट तक 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली इस आंधी ने शहर के रिहायशी इलाकों में स्थित सैकड़ों पेड़ उखाड़कर फेंक दिए। बिजली के खंभों पर आ धमके पेड़ों के कारण पोल, ट्रांसफार्मर, वायर तमाम तरह का नुकसान हुआ है। प्रशासन ने भोपू से ऐलान करवाया की शहर की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से बहाल होने के लिए चार दिन तक का समय लगेगा। समाचार लिखने तक जामनेर के कुछ इलाकों में बिजली वितरण के सफ़ल प्रयास किए गए हैं।

तूफान के दौरान आसमान से बारिश के साथ बर्फ के ओले गिरे जिससे निजी इमारतों को क्षति पहुंची। पुराने शहर में कई गरीबो की जुग्गिया तिनके की तरह हवा मे उड़ गई। तूफ़ान मे कई जगहों पर जीवित हानि की खबरे हैं। पहुर के निकट सोनाला गांव के पास 200 भेड़ें ओलो की शिकार बनीं। कितने मवेशी मारे गए उसकी आधिकारिक गिनती नहीं हो सकी है। पहुर में पुराने जमाने के लगभग सभी पीपल के पेड़ हवा से उखड़ गए। जामनेर में राहगीरों और मजदूरों के घायल होने की खबरे हैं। आज पूरा महीना बीत गया है राज्यभर में बेमौसमी बारिश के साथ तूफानी ओलों ने भयंकर कहर बरपा रखा है जिससे समूचे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। फलबागान, जवार, मका, बाजरा समेत सारी की सारी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक यह माहौल पांच मई तक रह सकता है।
मदद के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री महाजन

महाराष्ट्र दिवस के झंडारोहण के बाद नांदेड़ से अपने गृह नगर जामनेर पहुंचे मंत्री गिरीश महाजन ने तूफ़ान से तबाह इलाकों का मुआयना किया। मीडिया से बात करते हुए महाजन ने कहा की शायद ही जामनेर के लोगों ने इस प्रकार का नैसर्गिक कोहराम पहली बार देखा होगा। पीड़ित गरीब परिवारों को सरकार की ओर से सरकारी नियमों और पैमानों की तर्ज पर हर संभव सहायता की जाएगी। जरूरत पड़ने पर हम लोग “चंदा” जमा कर के तत्काल मदद करने की कोशिश करेंगे। बिजली व्यवस्था की बहाली के लिए तीन चार दिन लग सकते हैं। जानकारों की राय मे सरकार कैबिनेट की बैठक बुलाकर तत्काल प्रभाव से आर्थिक पैकेज की घोषणा करती तो शायद फौरी मदत के लिए मंत्री जी को चंदे की बात नही करना पड़ती। ज्ञात हो कि शिंदे फडणवीस सरकार मे शामिल 20 मंत्रीयो के पास दर्जनो विभागो के भार के साथ साथ 3 से 4 जिलो के अभिभावक मंत्री पद की जिम्मेदारी है ! भाजपा कोटे से मंत्री बने विधायको को पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव मे प्रचार की जिम्मेदारी दे रखी है। कामकाज की इतनी व्यस्तता के बीच इन नेताओ को काफी भागदौड़ करना पड़ रही है ! विपक्ष अभी भी मार्केट कमेटीयो के चुनाव नतीजो की खुशी से बाहर आने के मूड मे नजर नही आ रहा है।
