बुरहानपुर में प्राकृतिक खेती के दो दिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन करेंगे गुजरात के राज्यपाल | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

बुरहानपुर में प्राकृतिक खेती के दो दिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन करेंगे गुजरात के राज्यपाल | New India Times
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस

बुरहानपुर के मां वागेश्वरी ग्रामोदय मेला धामनगांव में 27 मार्च 2023 सोमवार को प्रात:11 बजे गुजरात के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत दो दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन करेंगे। ज्ञात रहे ग्रामोदय मेले में 27 और 28 मार्च 2023 को प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण होगा। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने बताया कि 22 मार्च गुड़ी पड़वा से 30 मार्च 2023 श्री रामनवमी तक बुरहानपुर के ग्राम धामनगांव में आयोजित मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेले में 24 मार्च से 29 मार्च 2023 कृषि संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन कृषकों को देशभर से पधारे वैज्ञानिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसी के तहत 27 मार्च 2023 को जिले के किसानों को प्राकृतिक विषय पर वर्चूअली संबोधित करेंगे।

गुजरात में प्राकृतिक खेती की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं राज्यपाल आचार्य देवव्रत

पूर्व मंत्री एवं प्रदेश भाजपा प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस ने बताया कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों के बीच प्राकृतिक खेती की जागरूकता बढ़ाने के लिए बहुत काम किया है। इससे पहले भी हरियाणा और हिमाचल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हजारों किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गुरुकुल में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वहां की जमीन पर रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान को समझा और उसके विकल्प के रूप में जैविक खेती करनी शुरू की। शुरुआती दौर में इतनी सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने रसायनों के जहर से मुक्त खेती करने की ठान ली थी इसलिए उन्होंने कई कृषि वैज्ञानिकों से इस पर बात की आखिरकार दो-तीन प्रयासों के बाद उन्हें इस कोशिश में सफलता मिली। आचार्य देवव्रत ने रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक तीनों तरह की खेती की है लेकिन उन्होंने ये अनुभव किया कि जैविक खेती का इतना प्रचार होने के बावजूद वह इतनी सफल नहीं है लेकिन प्राकृतिक खेती का इतना प्रचार नहीं हुआ फिर भी वह अधिक सफल हो रही है।
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने किसानों से आग्रह किया कि अधिक से अधिक संख्या में आकर इस प्रशिक्षण का लाभ उठाएं और प्रशिक्षण में जो भी अपनाने योग्य लगे उसे अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कोई नया विषय नहीं है। खेती तो प्राकृतिक ही होती हैं, अप्राकृतिक खेती ज्यादा समय तक चल ही नहीं सकती।

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