नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बिजली बोर्ड की ओर से नवंबर 2022 के मीटर रिडिंग लिए बिना ही दिसंबर 2022 के बिजली बिलों को दिसंबर 2021 के यूनिट खपत के आधार पर आंक कर ग्राहकों को मनमाने बिजली बिल थमाने का मामला जामनेर में सामने आया है। ठंड के मौसम में जहाँ घर के पंखे कूलर AC सब उपकरण बंद रहते है ऐसे में बिजली का इस्तेमाल कम होते हुए भी अगर बिल दो गुना ज्यादा आ गए तो आम आदमी को झटका लगना ही है।

जामनेर MSEB ने जो बिल बांटे हैं उसमें नवंबर का मीटर रीडिंग दर्ज नहीं है बल्कि अक्टूबर के रीडिंग के बाद सीधे दिसंबर का बिल काटा गया है। नवंबर के बिल ग्राहकों ने भर दिए हैं, बारीकी से पड़ताल करने पर पता चला कि बोर्ड ने बीते साल दिसंबर 2021 में बिजली खपत के जो यूनिट नोट किए थे वही इस दिसंबर 2022 में नोट कर बिलिंग प्रिंट आउट कर दिया है।

गड़बड़ी या फिर साजिश
मिस बिलिंग का ये मामला बिजली बोर्ड और रीडिंग ठेकेदार के बीच के असमन्वय का मसला है या फिर सरकार की कोई ऐसी साज़िश जिसका मकसद आम जनता की आर्थिक लूट करना हो। याद कीजिए उद्धव ठाकरे सरकार रहते तालाबंदी के दौरान पावर मिनिस्ट्री के मनमाने व्यवहार को लेकर बीजेपी ने सारे सूबे में आंदोलन करते हुए घमासान मचा दिया था। आज सत्ता में आने के बाद वही बीजेपी मौन धारण किए है। आश्चर्य तो इस बात का है कि यह मामला उस शहर से सामने आया जहाँ से बिजली विभाग की तमाम कमियों खामियों और नीतियो को लेकर समय समय पर अनुकूलता के अनुरूप ( सत्ता से बेदखल होने के बाद ) भाजपा की ओर से सबसे अधिक सरकार विरोधी आंदोलन किए गए है . इस कथित बिजली बिलिंग प्रकरण की सघन जांच इस लिए भी होनी चाहिए क्यो कि अब सवाल सरकार की नीयत पर उठने लगे है।
