पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT;
पिछले कई महीनों से अपने भुगतान के लिए भटक रहे एक सप्लायर ने पेंमेंट न मिलने के बाद अब पूरी राशि ग्राम पंचायत को ही दान करने का फैसला किया है। सप्लायर का कहना है कि गरीब ग्राम पंचायत को दान कर उसे खुशी होगी कि ग्राम पंचायत के विकास में उसका भी योगदान है।
पिछले साल सप्लायर ने ग्राम पंचायत में मोक्षधाम के निर्माण के दौरान 57 ट्राली मुरम की सप्लाई की थी। जिसका भुगतान उसे आज तक नहीं मिल सका। बार-बार तकादा न मिलने के बाद सप्लायर ने पंचायत को शर्मिंदा करने के लिए यह कदम उठाया ताकि पंचायत के पदाधिकारियों की आंखे खुल जाएं।
इनदिनों ग्राम पंचायत छपारा जमकर विवादों में घिरी हुई है कभी फर्जी भुगतान को लेकर शिकायत की जा रही हैं तो कहीं आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं जिसमें 11 पंचों ने भी विभिन्न मामलों को लेकर ग्राम पंचायत की लापरवाही को लेकर शिकायत की थी हालांकि उस शिकायत का निराकरण क्या हुआ अब तक खुलासा नहीं हो पाया है इस खुलासा नहीं होने से शिकायतकर्ता उप सरपंच और पंच यह जानने के लिए क्या कार्रवाई हुई बेसबरी से इंतजार कर रहे हैं मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायतों में शुमार ग्राम पंचायत छपारा की छवि सबसे अनोखी मानी जा सकती है दरअसल ग्राम पंचायत छपारा में मुरम का भुगतान पाने के लिए भटक रहे सप्लायर के द्वारा आप अपनी बकाया 11.400 रुपय कि रकम को ग्राम पंचायत को देने के लिए आवेदन दिया गया है ताकि ग्राम पंचायत की आर्थिक स्थिति सुधर सके।
छपारा नगर के गोकलपुर के दलसागर वार्ड क्रमांक 20 के निवासी ठाकुर सौरव सिंह ने पंचायत को 57 ट्राली मोरम प्रदान की थी उनके द्वारा इसके भुगतान के लिए लगातार पंचायत के चक्कर लगाए जा रहे थे पर उन्हें भुगतान नहीं मिला तब उन्होंने निर्णय ले लिया कि ग्राम पंचायत को एक पत्र लिखकर मुरम की बकाया राशि 11.400 रुपए के लिए सरपंच और सचिव की दयनीय स्थिति को देखते हुए दान में देने की पेशकश की है ताकि उनकी यह ग्रामपंचायत की स्थिति में सुधार हो सके यह मामला अपने आप में अनोखा है जिसको लेकर कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं
