नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जामनेर तहसील के 158 गांवों के करीब ढाई लाख नागरिकों के स्वास्थ की जिम्मेदारी संभाल रहे 7 प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों और उसके अधीन 41 उपकेंद्रों की बदहाली पिछले 3 दशकों से चिंता का विषय बना हुआ है. बेटावद, फत्तेपुर, गारखेड़ा, नेरी, शेंदुर्नी, वाकडी, वाकोद PHC (primary health Centre) में 14 वरिष्ठ डॉक्टर्स के सभी पद भरे गए हैं. अस्थापना में औषधि निर्माण अधिकारी के 2 पद, स्वास्थ सहायक 1, ANM 1, सफाई कर्मी 2, चपरासी 6 इस तरह 12 पद रिक्त हैं, वहीं PHC के अधीन 4/5 गांवों के लिए एक उपकेंद्र इस तरह से मंजूर 41 उपकेंद्रों में ए 28 की इमारते खड़ी है जिनपर पड़े ताले तभी खुलते हैं जब सरकार की ओर से कोई व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ मुहिम चलानी होती है. जानकारी के मुताबिक 4 उपकेंद्रों की इमारतों को मंजूरी मिल गई है जिनके बनने के बाद कुल 32 उपकेंद्र हो जाएंगे यानी 9 उपकेंद्रों की इमारते बनने के लिए जनता को विधानसभा की एक और टर्म की प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है. हर उपकेंद्र के लिए 3 कर्मचारियों की आवश्यकता है मतलब 41 के लिए कुल 123. वर्तमान में कार्यरत 28 उपकेंद्रों के लिए 84 कर्मचारियों की आवश्यकता है लेकिन मात्र 42 कर्मचारी नियुक्त हैं और आधे पद खाली पड़े हैं. तहसील के ग्रामीण इलाकों में सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही स्वास्थ सुविधाओं की वास्तविकता को दरकिनार कर स्वास्थ रक्षकों को फरिश्तों की तरह पेश कर दल विशेष के लिए महानतम राजनीतिक माहौल बनाने का तर्कहीन प्रोपगेंडा लगातार जारी है जिसमें तमाम मीडिया प्लेटफॉर्मस की ओर से दिया जा रहा योगदान अभूतपूर्व है. न्यूज रिपोर्ट में PHCs को लेकर दर्ज यह सच ग्राम विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले जिला परिषद संचालित स्वास्थ केंद्रों का है अभी तो सार्वजनिक आरोग्य मंत्रालय के अधीन आने वाले अस्पतालों की अपनी अलग विवेचना है.
