शारिफ अंसारी, मुंबई, NIT;
उत्तर भारतीय बुनकर समाज संगठन के अध्यक्ष हबीब अंसारी ने कपड़ा पर जीएसटी लगाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए इसे पावरलूम मालिकों, कपड़ा व्यापारियों तथा बुनकरों के लिए काला कानून बताया है।
हबीब अंसारी ने प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री को भेजे ज्ञापन में मांग की है कि कपड़ा पर से जीएसटी हटाया जाए, साथ ही लघु उद्योग के श्रेणी में आने वाले छोटे-छोटे पावरलूम कारखाना मालिकों को जीएसटी से मुक्ति दी जाए और यार्न पर पुराने टैक्स की तरह 12.5 प्रतिशत जीएसटी लगाई जाए। अंसारी ने अपने बयान में सरकार को चेतावनी दी है कि कपड़ा व्यापारियों को जीएसटी में लाने का हम पुरजोर विरोध करते हैं, करते रहेंगे और ज़रुरत पड़ी तो मुंबई से लेकर दिल्ली तक धरना प्रदर्शन भी करेंगे।

उत्तर भारतीय बुनकर समाज संगठन के अध्यक्ष हबीब अंसारी ने अपने बयान में कहा कि जीएसटी लागू होने से कपड़ा बाज़ार में नया संकट आ खड़ा हुआ है। विगत तीन सालों से आर्थिक मंदी का संकट झेल रहा भिवंडी तथा महाराष्ट्र सहित देश का पावरलूम उद्योग बर्बादी की कगार पर आ गया है। अगर सरकार ने जीएसटी का सही ढंग से हल नही निकाला तो कपड़ा व्यापारियों तथा पावरलूम मालिकों को कारोबार बंद करना पड़ जाएगा। अंसारी ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद से भिवंडी में करीब 60 प्रतिशत पावरलूम कारखाना बंद पड़ा है। जिसमें काम करने वाले हज़ारों लोग बेरोजगार होकर भुखमरी का दंश झेलने पर मजबूर हैं। हजारों पावरलूम मजदूर भिवंडी से पलायन कर चुके हैं। इसी तरह छोटे कारखाना मालिकों के सामने परिवार पालने का संकट आ खड़ा हुआ है। बच्चों की पढ़ाई, दवा इलाज, शादी व्याह, कारखाने का बिजली बिल, आदि जैसी पारिवारिक दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।भिवंडी के ज्यादातर पावरलूम मालिक क़र्ज़ में डूबे हुए हैं। जीएसटी लागू होने से कपड़ा बाज़ार में बड़ी दिक्कतें पेश आ रही हैं। जीएसटी से अच्छे नही बल्कि कपड़ा व्यापारियों व पावरलूम मालिकों के लिए बुरे दिन आ गए हैं। अंसारी के अनुसार देश में कृषि के बाद टेक्सटाइल सबसे बड़ी इंडस्ट्री है। यह सभी 14 तरह के कुटीर उद्योग से जुड़ा है। आजादी के बाद से आज तक कपड़ा फ्री था, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने बिना तैयारी के एकाएक कपड़े पर टैक्स लगाकर कपड़ा व्यापारियों को दोहरे संकट में डाल दिया है। इसके पहले यार्न पर 12.5 प्रतिशत टैक्स था, अब सरकार ने यार्न पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। हमारी मांग है कि सरकार किसी एक स्तर पर या तो शुरू में या तो अंत में जीएसटी लगाए। यदि सरकार यार्न पर जीएसटी लगा देती है तो इससे सरकार को राजस्व अधिक मिलेगा और व्यापरियों की परेशानियां दूर हो जाएंगी। वरना लघु उद्योग के अंतर्गत आने वाले छोटे-मोटे कारखाना मालिक का धंधा चौपट हो जाएगा। कपड़ा व्यापरियों से कहा जा रहा है कि इसमें सुधार नही हो सकता। अगर सुधार नही हुआ तो व्यापारी भी आंदोलन बंद नही करेंगे। कपड़ा व्यापार चौपट होने से सरकार को करोड़ों रूपए के राजस्व का नुक्सान होगा। साथ ही इस पूरे धंधे से जुड़े लाखों मजदूर बेरोजगार होंगे, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरकार की होगी।
