नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जलगांव जिले के 12 टीएमसी क्षमता वाले सबसे बड़े वाघुर डैम से प्रभावित गांवों के पुनर्वास का कामकाज कुछ सालों पहले पूरा हो चुका है. डैम के लिए जामनेर के दर्जन भर गांव विस्थापित फिर पुनः स्थापित किए गए. वाघुर नदी के किनारों पर स्थित खेतों और मानवी बस्तियों को जोड़ने के लिए हिवरखेड़ा और नेरी के निकट ऐसे दो बड़े पुल डेकोरेट किए गए है जिनमें से नेरी के पास वाले पुल का काम बैक वाटर के कारण अधर में लटका है. करीब 2 करोड़ की लागत से बनने वाले इस पुल के आधे से अधिक फाउंडेशन पिलर का निर्माण किया जा चुका है कुछ शेष है. पुल के दोनों छोर के ज़ीरो भी मिला लिए गए है मात्र सड़क बनानी बची है. हमने अधर में लटके पुल के काम को लेकर ब्रिज के सुपरवाइजर से जानकारी हासिल की तो बताया गया कि डैम के बैक वाटर की लेवल 2 से ढाई मीटर की है जिसके कारण ब्रिज का निर्माण कार्य रोका गया है, जैसे ही पानी की लेवल कम होगी वैसे काम शुरू किया जाएगा. अब जून आरंभ हो गया है मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है, डैम में 70 फीसद पानी है, डैम की वाटर लेवल 2 मीटर तक बनी हुई है यानी ब्रिज का काम इस साल भी पूरा नही हो सकता. वर्क आर्डर के मुताबिक किसी भी सरकारी निर्माण को पूरा करने के लिए समय निर्धारण किया जाता है उसके अनुसार अगर काम न हुआ तो निर्माण कार्य के लिए आवश्यक चीजों के अतिरिक्त दरो को सुनिश्चित कर उस निर्माण को पूरा करने के लिए सरकारी तिजोरी से पैसा आबंटित करना पड़ता है. संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण यहाँ भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ को सरकार को उठाना पड़ेगा. इस काम को लेकर एक जानकारी ये भी मिल रही है कि भले ही ब्रिज का ठेका वर्मा नाम के ठेकेदार को दिया गया है लेकिन असल में सिंचाई विभाग का कोई ऐसा अधिकारी है जिसने आपसी साठगांठ से इस काम का जिम्मा अपनी ओर लिया है जिसके चलते विकासक को अब तक के सरकारी भुगतान किए जा चुके हैं और वाटर लेवल की वजह बताकर जानबूझकर काम को अधर में लटकाया गया है ताकि अतिरिक्त खर्चा डालकर सरकारी तिजोरी से पैसा ऐंठा जाए फिर ब्रिज बने या ना बने. इस खेल के जांच की मांग किसानों की ओर से की जा रही है.
