सलमान चिश्ती, लखनऊ, NIT;
उत्तर प्रदेश सरकार के लाख निर्देशों व कोशिशों के बाद भी ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली पहुंचाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पूरे प्रदेश और खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की स्थिति काफी खराब है। कहीं लो वोल्टेज से लोग परेशान हैं तो हाई वोल्टेज से, उसके साथ ही बार-बार बिजली कटौती ने तो ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों के नाकों में दम कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति के ऐलान के बाद लोगों को आस जगी थी कि अब बिजली कटौती और दूसरी समस्याओं से निजात मिल जाएगी लेकिन यह ख्वाब अभी ख्वाब ही बना हुआ है। न बिजली कटौती खत्म हो रही है और न ही बिजली विभाग के अधिकारी व लाइनमैन ही सुधर रहे हैं। प्रदेश के अधिकतर गांवों में जहां लोगों को बिजली कटौती का सामना है वहीं लो वोल्टेज और हाई वोल्टेज से लोग और भी परेशान हैं। यही हालत रायबरेली जिले का भी है। इस समय रायबरेली जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ ऐसा ही हाल है।हयहां 18 घंटे की जगह यह 6 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है। नतीजतन लोगों का बुरा हाल है। इस वजह से ग्रामीणों के दिन बेचैनी से और रात रतजगा करके कट रही है। बिजली ना मिलने से नाराज ग्रामीणों का भी सब्र जवाब दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले दिनों में रोड पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
खीरों कस्बे में बिजली-बनी डिस्को लाइट
हर रोज जब बिजली आती है तो सभी मोहल्लों में बल्ब व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फ्लक्चुएट होने लग जाते हैं। हर सेकंड बिजली का वोल्टेज बढ़ता फिर घट जाता है, जैसे डिस्को लाइट लगी हो। खीरों कस्बे में बिजली सप्लाई का हाल बेहाल है। लेकिन हकीकत यह है कि जिस मौसम में लोगों को बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उस दौरान ही इससे तरसाया जा रहा है। सवाल पूछने पर बिजली कंपनी के अफसर हर बार की तरह मेंटीनेंस का राग अलापने के साथ ही लोगों को विद्युत ट्रांसमिशन की तकनीकी भाषा पढ़ाने लगते हैं। कंपनी अधिकारियों की बेरुखी का आलम यह है कि संबंधित मोहल्लों में बिजली गुल होते ही उनके मोबाइल भी स्विच ऑफ हो जाते हैं। इन सब बातों को लेकर ग्रामीण वासियों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।
