नरेंद्र कुमार जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आज राज्य में साढ़े तीन हजार मेगा वैट बिजली की कमी है, सरकार की ओर से लोडशेडिंग शुरू कर दिया गया है जिसके कारण किसान, आम आदमी परेशान हो चुका है. ठाकरे सरकार के आधे मंत्री भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में हैं बाकी बचे आपस में लड़ झगड़ रहे हैं. जनता की किसी को फिक्र नहीं रही. अगर आने वाले तीन दिनों के भीतर बिजली समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जिले के सभी हाइवे जाम कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा. ऐसी चेतावनी पूर्व मंत्री गिरीश महाजन ने राज्य सरकार को दी है. बिजली समस्या को लेकर जलगांव में आयोजित आक्रोश मोर्चा के दौरान मीडिया से बात करते हुए महाजन बोल रहे थे. ठाकरे सरकार को फिरौती मांगने वाली, हफ्ते वसूलने वाली, प्रशासनिक तबादलों में रुपये ऐंठने वाली सरकार होने का आरोप लगाते हुए महाजन ने बतौर पूर्व मंत्री अपने कद को बरकरार रखने का प्रयास किया. बढ़ती महंगाई पर पूछे गए सवाल पर महाजन ने कहा यूक्रेन रूस युद्ध के कारण दुनिया युद्ध की छाया में है, तेल का आयात ठप है. श्रीलंका मे पेट्रोल 400 रु लीटर बिक रहा है. हम मानते हैं महंगाई बढ़ी है लेकिन तेल के दाम वैश्विक बाजार पर निर्भर करते हैं. महंगाई के नाम पर भाजपा विरोधी विपक्षी दल आंदोलन करते हैं पर उसमें लोग दिखाई नहीं पड़ते. आक्रोश आंदोलन में भाजपा के दोनों सांसद, सभी वर्तमान तथा पूर्व विधायक, पदाधिकारी मौजूद रहे. महाजन ने महंगाई को युद्ध से जोड़ दिया पर कोयले के अभाव से पनपी बिजली उत्पादन की समस्या भी एक वैश्विक देन है इस पर प्रकाश नहीं डाला. विदित हो कि कोरोना महामारी से दो साल तक ठप पड़ी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं अग्रणी स्थान पाने के लिए अचानक एक्टिव हो गई जिससे बिजली की मांग प्रचंड बढ़ गई, इस मांग को पूरा करना अब तक संभव न हो सका है. भारत में कुल 135 पावर प्रोजेक्ट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं. गुजरात, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र अन्य राज्यों ने कोल स्टॉक की कमी से केंद्र को बार बार अवगत कराया है. गैर भाजपा शासित राज्यों में विपक्षी दल भाजपा के नेताओं ने वास्तविकता से किनारा कर राज्य सरकारों के खिलाफ सुर्खियां बटोरने का प्रोग्राम आरंभ कर दिया है. बेहतर होगा कोयला किल्लत मसले पर केंद्र और राज्य मिलकर काम करें.
महाराष्ट्र में सबसे महंगी बिजली – भारत के तमाम राज्यों की तुलना मे सबसे महंगी बिजली महाराष्ट्र में बेची जा रही है. कोरोना काल में जनता से मनमाने बिजली बिल वसूलने से लेकर जुड़े उन घोटालों को लेकर जो किसी भी वक्त उजागर हो सकते हैं इन तमाम मामलों मे ऊर्जा मंत्रालय के मंत्री नितिन राउत का कामकाज काफी अप्रिय रहा है. विपक्ष ने कई बार राउत के इस्तीफे की मांग की बावजूद इसके काम में सुधार नहीं हो सका.
