नरेंद्र इंगले, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2015-16 मे विधायक गिरीश महाजन के मंत्री रहते 8 करोड़ की लागत से बनाई गई फोरलेन सड़क ने शहर की सुंदरता में अच्छा रोल प्ले किया लेकिन इसके साथ साथ सड़क पर रफ्तार पकड़ चुके वाहनों से आए दिन हो रहे हादसों का नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया है. पाचोरा Y point से लेकर नगर निगम, भुसावल रोड, वाकी रोड, बस स्टैंड ये सभी T points हादसों के स्पॉट बन चुके हैं. बायपास के अभाव से इसी फोरलेन से होकर गंतव्य तक जाने वाले भारी वाहनों द्वारा T point’s पर डिवाइडर तक को तोड़ने की घटनाएं अतीत में हो चुकी हैं. इन हादसों का मुख्य कारण फोरलेन पर गतिरोधक का न होना है. शीर्ष अदालत के फैसले के मुताबिक स्पीड ब्रेकर को ब्रेक लगाया गया है पर सघन नागरी बस्ती वाले इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा के चलते संबंधित विभाग जनता की मांग के आधार पर अपने दायित्व को विवेक से निर्वहन कर स्पीड ब्रेकर फ्रेम कर सकता है. जामनेर की यह फोरलेन सड़क लोकनिर्माण विभाग (B&C) के स्वामित्व में है. सड़क के दोतरफा स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, शॉपिंग मॉल समेत आधा शहर बसा हुआ है तमाम T point’s पर स्पीड ब्रेकर की मांग काफी पुरानी है जो अब तक मानी नहीं गई. B&C की अनदेखी से हो रहे इन हादसों में आखिर कितनों को चोटिल होना पड़ेगा या फिर अपनी जान गंवानी पड़ेगी? आश्चर्य की बात तो ये है कि इस सड़क के किसी भी तिराहे पर अन्य शहरों की ओर जाने के लिए लगाए जाने वाले दिशादर्शक सूचना बोर्ड तक नहीं है. छोटी छोटी बातों को लेकर तहसीलदार तथा अन्य प्रशासन प्रमुखों को निवेदन सौंपकर स्थानीय अखबारों के ग्रामीण पन्ने पर टेबल न्यूज की शक्ल में जगह बनाने वाले नेता या नेता बनने की ख्वाहिश रखने वाले किसी ने भी आज तक मुख्य सड़क पर ब्रेकर बनाने की मांग को लेकर शिकायत तो दूर प्रशासन को साधारण पत्र तक नहीं लिखा है. हादसा होने पर यही चमको मंडली घायलों को अस्पताल रेफर करने और विवाद सुलझाने में नजर आ जाती है. ब्रेकर के अभाव से हर दिन हो रहे हादसों के लिए आम जनता में B&C के कामकाज को लेकर काफी असंतोष देखा जा रहा है.
