मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
आल इंडिया हज वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकीत ख़ान (खंडवा) ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय एवं राज्य हज कमेटियों के पुनर्गठन की मांग को लेकर केंद्रीय हज कमेटी मुंबई के पूर्व सदस्य हाफिज़ नौशाद अहमद आज़मी मऊ (उ.प्र.) ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हज विधायक 2002 की धारा 3 एवं 4 के अनुपालन में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्रीय एवं राज्य हज कमेटियों के पुनर्गठन की मांग की है। इसके साथ ही हज एक्ट के सेक्शन 17 एवं 18 के अंतर्गत राज्य हज कमेटियों का पुनर्गठन करने और फंड के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिये ठोस आदेश जारी करने की मांग माननीय न्यायालय से की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने 6 सप्ताह के अंदर सभी राज्य हज कमेटियों, केंद्रीय हज कमेटी सहित विदेश मंत्रालय, अल्पसंख्यक मंत्रालय और हज सेल से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक अनुच्छेद 32 के अंतर्गत जनहित याचिका हज यात्रा को आसान बनाने के लिये दाखिल की गई है। याची ने कहा कि वे पिछले एक साल से इस सिलसिले में सम्बंधित अधिकारियों से पत्र व्यवहार कर रहे थे, लेकिन अभी तक उसका कोई नतीजा नहीं निकला, जिस वजह से मजबूर होकर उन्हें माननीय उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तल्हा अब्दुर्रहमान के माध्यम से 25 अक्टूबर 2021 को दायर की गई इस जनहित याचिका में केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, केंद्रीय हज कमेटी व 19 राज्य हज कमेटियों को भी पार्टी बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि हज विधेयक 2002 के सेक्शन 4 के तहत हज यात्रियों के ज़रिए जमा की जाने वाली धनराशि का उचित इस्तेमाल किया जाए।
याचिकाकर्ता हाफिज़ नौशाद अहमद आज़मी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के शुक्रगुज़ार हैं कि माननीय न्यायालय ने हमारी याचिका पर गौर करते हुए सम्बंधित विभागों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट हाजियों के हित में बेहतर फैसला करेगा।
