त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ अन्नदाता को गुलाम बनाने वाले काले कृषि कानूनों का रद्ध किया जाना देश के किसानों के ससत् संघर्ष और सैकड़ों किसानों की शहादत का परिणाम है। यह देश के इतिहास में किसानों की सबसे बड़ी जीत है जिसने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि इस देश में गांधी के आदर्शों पर चलकर ही तानशाह व्यवस्था को झुकाया जा सकता है। उक्त बात प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं देवरी कांग्रेस विधायक हर्ष यादव ने कृषि कानूनों की वापिसी के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 1 वर्ष पूर्व पारित किए गये 3 कृषि कानून देश के किसानों के हितों पर कुठाराघात था। उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए बनाये गये इन काले कानूनों से देश के अन्नदाता को गुलाम बनाने की साजिश थी। इन कानूनों के विरोध में किसान संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं, सत्तारूढ़ दल द्वारा उन्हें अपमानित करने के कई षड़यंत्र एवं कुचक्र रचे गये परंतु अंत में सत्य और न्याय की जीत हुई यह विश्व के इतिहास में कृषकों द्वारा किया जाने वाला सबसे बड़ा और लंबी अवधि का आंदोलन था जिसने सिद्ध कर दिया कि राष्ट्रपिता गांधी का अहिंसा पर चलने वाला रास्ता सबसे कारगार है। यह देश गांधी के मार्ग पर चलने वालों का देश है गोडसे के राह पर चलने वालों का नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इन कानूनों को लेकर शुरू से ही किसानों के हर आंदोलन का समर्थन किया था एवं इन्हें रद्ध कराने के लिए संसद से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध किया था। आज परिणाम सामने है अंत में तानाशाह सरकार को निहत्थे किसानों के आगे झुकना पड़ा और सत्य की जीत हुई। श्री यादव ने कहा कि किसानों के हित की लड़ाई अभी खत्म नही हुई है मैं केन्द्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री जी से मांग करता हूं कि यदि वह देश के किसानों का भला चाहते हैं तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी घोषित करें ताकि इस देश के करोड़ों कृषकों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। केन्द्र एवं राज्य सरकार किसानों एवं आम नागरिकों के हित में डीजल पेट्रोल सहित आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि वापिस लें ताकि देश में खुशहाली और अमन चैन वापिस कायम हो।
