रहीम शेरानी निसार शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मेघनगर के बस स्टैंड पर चर्चित राम भाई पान वाले की पुत्री रीना गोड का विवाह नीमच शहर में होने से रीना अपने परिवार के साथ नीमच निवास करती है। अपने ससुराल में रह रही रीना को अचानक डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी ने अपनी आगोश में ले लिया। समाचार मिलने पर एक बाप को अपनी बेटी की खैर खबर लेने के लिए जाने को मजबूर होना पड़ा। हालांकि एक बाप का यह फर्ज भी है कि वह अपने बच्चों के सुख दुख में शामिल हो। लेकिन, जब राम भाई और उनके परिवार को जानकारी मिली कि उनकी पुत्री रीना का डेंगू बीमारी से स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया है तब राम भाई अपनी पत्नी और अपने पुत्र विशाल के साथ प्राइवेट वाहन जिसके ड्राइवर वसीम पठान थे उन को अपने साथ लेकर अपनी पुत्री का स्वास्थ्य मालूम करने के लिए नीमच पहुंचे। वहां जाकर देखा तो पता चला कि रीना की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे नीमच से उदयपुर राजस्थान रेफर कर दिया गया।
उदयपुर के सिविल अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना था कि रीना के शरीर में पेटलेस (कण) कम होने पर उसे अर्जेंट “बी पॉजिटिव” पेटलेस की आवश्यकता है। बी पॉजिटिव पेटलेस की सभी जगह तलाश करने पर पेटलेस की व्यवस्था कहीं से भी होती हुई नजर नहीं आई। राम भाई और उनका पूरा परिवार पूरी तरह से परेशान दिखाई दे रहा था। ऐसे में मानवता का परिचय देते हुए ड्राइवरी करने के लिए निकले ड्राइवर वसीम पठान ने इंसानियत का सबूत देते हुए अपने आप को आगे किया और कहा कि मेरा बी पॉजिटिव ग्रुप है, मेरी जांच की जाए मैं अपनी बहन के लिए बी पॉजिटिव पेटलेस देने के लिए तैयार हूं। और वसीम पठान ने तत्काल फैसला कर अपने पेटलेस देने के लिए हामी भरी जिस पर डॉक्टर द्वारा वसीम का ब्लड सैंपल लेकर जांच की गई जो सही पाए जाने पर 300 एम.एल. पेटलेस वसीम द्वारा रीना को तुरन्त डोनेट किया गया! सही समय पर पेटलेस मिल जाने पर राम की रीना को राहत मिली जिसके कारण रीना का स्वास्थ्य स्वस्थ होकर रीना की तबीयत में काफी सुधार हुआ। जिस पर परिवार के सदस्यों के चेहरे से मायूसी खत्म होकर मुस्कुराहट लौट आई।
परिवार के सदस्यों ने वसीम पठान का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।
देश भर में जिस तरह से जातिवाद को लेकर चारों ओर माहौल बिगड़ा हुआ दिख रहा है ऐसे समय पर एक मुस्लिम भाई ने अपनी हिंदू बहन के लिए सही समय पर जो भूमिका निभाई है वह भाईचारे की एक मिसाल बन गई है। वहीं दूसरी ओर वसीम ने बताया कि इस बहाने अल्लाह ने खुश होकर उसके जरिए एक नेक काम करवाया है। इस नेक काम के करने पर में काफी खुश हूँ।
स्मरण रहे कि इसके पूर्व भी वसीम कई बार मरीजों को निःस्वार्थ अपना ब्लड डोनेट कर चुके हैं!
