वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

कृषि विज्ञान केन्द्र जमुनाबाद सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन योजना पर पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित की गई. इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने फसल अवशेष प्रबंधन करके उसका लाभ लेने की जानकारी दी। केन्द्र अध्यक्ष डॉ एसके विश्वकर्मा ने किसानों को तकनीकी जानकारी देते हुए कहा कि वे इस अमूल्य फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसी खेत में या बाहर विभिन्न तकनीकों से सड़ाकर खेत में मिलाने के महत्त्व बताया जाए।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मो. सुहेल ने सब्जियों के अवशेषों को सड़ाकर मिट्टी में मिलाने की सलाह दी। पशु पालन वैज्ञानिक डॉ एनके त्रिपाठी ने फसल को पशुओं को चारा के रूप में प्रयोग करने की तकनीक बताई। फसल वैज्ञानिक डॉ पीके बिसेन ने मिट्टी में पोषक तत्वों के महत्व बताते हुए कहा कि फसल अवशेष को वेस्ट डिकंपोजर से जल्दी सड़ाया जाता है, जिससे कि फसल की बुआई समय पर की जा सकती है । प्रसार वैज्ञानिक डॉ जिया लाल गुप्ता ने बताया कि फसल अवशेषों को मृदा में मिलाने से मिट्टी मुलायम हो जाती है जिससे कि जल धारण क्षमता में सुधार और वायु संचार में वृद्धि होती है और जल को सोखने और नमी को रोकने में मदद मिलती है ।इस कार्यक्रम में 25 किसानों ने भाग लेकर फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त की तथा अपने फसल अवशेष को मिट्टी में विभिन्न तकनीकों से मिलने की बात स्वीकार की।
