रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

करवा चौथ पुरे देश मे कार्तिक मास के शुल्क पक्ष की चतुर्थी (चौथे दिन) को मनाया जाता है. महिलाओं को इस व्रत (उपवास) का बेसब्री से इंतजार रहता है. विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत निर्जल उपवास रखती हैं.
24 अक्टूबर रविवार के दिन चतुर्थी तिथि सुबहा 3 बजे से शुरु हो कर 25 अक्टूबर को सुबहा 5 -43 पर समाप्त होगी.
करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है!करवा या करक मिट्टी के पात को कहते है जिसमें चंद्रमा को जल अर्पण जो कि अधर्य कहलाता है! कहा जाता है पुजा के दौरान करवा बहुत ही महत्वपूर्ण होता है चांद को अर्घ देने के बाद तोड़ा जाता है.

व्रत करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक ही दीन होते हैं इस दिन भगवान गणेश के लिए उपवास करने का भी दिन होता है!
विवाहित महिलाएं पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत पुरी निष्ठा के साथ करती हैं. महिलाएं अपने व्रत को चांद के दीदार कर ओर अर्घ अर्पण कर ने के बाद ही तोड़ती है ! करवा चौथ का व्रत बड़ा कठोर होता है!
इस को बिना जल ओर अन्न ग्रहण किए बगैर ही किया जाता है I रात को चंद्रमा के दर्शन जब तक नहीं होते तब तक किया जाता है ! महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है ! करवा चौथ का व्रत निर्जल रखा जाता है ! इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहन ओर सोलह श्रंगार कर चांद को अघ्य देती है ! चांद के पूजन ओर दर्शन के बाद पति के हाथों से जल पीकर अपना व्रत उपवास तोड़ती है ! उसके बाद घर के सभी बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेती है!
