रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ जिले के मेघनगर ग्राम पंचायत से नगर परिषद बने लगभग 7 साल का समय बितने को है लेकीन मेघनगर की व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत से भी बदतर हो गई हैं. यहाँ आलम यह है कि परिषद के जनप्रतिनिधियों का एक कार्यकाल पूरा हो चुका है.
वर्तमान में नगर परिषद का संचालन प्रशासक एसडीएम और सीएमओ के जिम्मे है जिसे 1 साल का समय होने को है बावजूद शहर में व्याप्त अव्यवस्था लोगों का मुह चिढ़ा रही है।
नगर के मुख्य मार्गों पर हो रहे गड्ढे बारिश में प्रतिदिन दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं लेकिन नगर परिषद का इस ओर ध्यान नहीं है।
लगता है प्रशासन कोई बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? इसके पूर्व में भी नल जल योजना के गड्ढे में नगर के युवा को शारीरिक छति पहुंचा चुके है जिसकी जानकारी नगर परिषद अधिकारी को दूरभाष से दी गई फिर भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है.

नगर में चर्चा का बाजार गर्म है कि मुख्य मार्गों की सड़कें कब बनेगी अथवा इस गड्ढों से नगर वासियों को किस प्रकार निजात मिलेगी.
जनप्रतिनिधि होने पर नगरवासी उन्हें जिम्मेदार मानते थे परंतु अब शासन के हाथों नगर की कार्यप्रणाली होने से अधिकारी सर्वे सर्वा है अब आगे नगर परिषद अधिकारी किस प्रकार नगरवासियो की उम्मीद पर खरे उतर कर इसका समाधान करते है या इसी तरहा नगर के नागरिक नरक की जीवन बितायेगे.
चुनाव के समय तो बड़े बड़े वादे कसमे खाई जाती हैं !
नगर का सबसे बड़ा नाला आज भी खुला पडा है !
नगर के मुख्य मार्गों ओर बेसकिमती सरकारी जमीनो पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है !
क्या जिला कलेक्टर इस ओर ध्यान देकर नगर वासियों को परेशानी से निजात दिलाएंगे !
