संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

गरीब मजदूर सेवार्थ पाठशाला शाखा बिरला नगर द्वारा रेलवे स्टेशन के पास झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे सहरिया जनजाति के बच्चों एवं उनके परिवारजनों को किसी भी प्रकार के व्यसन (नशा) से दूर रहने एवं स्वच्छता के बारे में जानकारी देने के लिए ब्रह्माकुमारीज संस्थान ग्वालियर से राजयोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरणात्मक वक्ता ब्रह्माकुमार प्रहलाद भाई को आमंत्रित किया गया.
इस अवसर पर गरीब मजदूर सेवार्थ पाठशाला के संरक्षक ओम प्रकाश दीक्षित, अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर सूरज मनकेले भी उपस्थित थे जो कि इन गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते है.
शाखा का यह मानना है कि प्रत्येक बच्चे का शिक्षित होना जरूरी है विशेषकर गरीब मजदूर झुग्गी झोपड़ियो में रहने वाले भाईओं के बच्चों को. ओ पी. दीक्षित ने बताया कि जो शिक्षक यहाँ पर स्वयंसेवक के रूप में शिक्षा देते है वह अपने विद्यालय का कार्य पूर्ण करने के बाद यहाँ निःशुल्क सेवा करते हैं.शहर में अन्य कई जगह भी निःशुल्क शिक्षा सेवा का कार्य चल रहा है.
सभी बच्चो को चरित्र निर्माण एवं नैतिक शिक्षा के बारे में बताते हुए बी. के. प्रह्लाद भाई ने कहा कि आज हर एक व्यक्ति अपने जीवन में ऊँचाइयाँ, सफलता प्राप्त करना चाहता है परन्तु उसके लिए स्वयं को सबसे पहले एक सच्चा और अच्छा इंसान बनाने की आवश्यकता है साथ ही अपने व्यव्हार में तथा प्रत्येक कर्म में सच्चाई और ईमानदारी को अपनाना आज सभी के लिए बहुत ज़रूरी है उसी के साथ अपने जीवन में नैतिक मूल्यों व अच्छाइयों को धारण करेंगे तो निश्चित ही सभी का चरित्र श्रेष्ठ बन जायेगा और हमें हर कार्य में सफलता भी ज़रूर मिलेगी. वर्तमान समय में एक अच्छा और सच्चा व्यक्ति बनने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि अपने आप को बुरी आदतों से व बुरे संग से बचाए क्योकि कई बच्चे एवं बड़े आज बुरे संग मे आकर तम्बाकू, बीडी, सिगरेट जैसे पदार्थों को सेवन करने लग जाते हैं, जुआ आदि जैसे गलत कार्यों में अपने आप को व्यस्त कर लेते हैं हमें परमात्मा ने इतना अच्छा जीवन दिया है तो उसे सार्थक कार्यो में लगाएं। व्यर्थ के कार्यो में अपना समय बर्बाद न करें।
हमेशा दूसरों के सहयोगी बनें तो जीवन मे खुशी का अनुभव होगा. इसके साथ ही स्वयं का सत्य परिचय कराते हुए कहा कि हम सब एक चेतन शक्ति हैं जिसको आत्मा, रूह या प्राण कहा जाता है. आत्मा मस्तक पर भ्रकुटी के मध्य चमकते हुए सितारे के रूप में विराजमान होती है. जब तक आत्मा शरीर के अन्दर होती है शरीर कार्य करता है. आत्मा अजर- अमर- अविनाशी है. कर्मों के अनुसार आत्मा इस सृष्टी रुपी रंग मंच पर अपना अभिनय करती है इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए. आत्मा के अन्दर तीन शक्तियां होती है, जिसके द्वारा वह कार्य करती है – मन, बुद्धि और संस्कार. मन का कार्य है सोचना, बुद्धि का कार्य है निर्णय करना और मन और बुद्धि के द्वारा हम जो कर्म करते है वह हमारी आदत और संस्कार बन जाते है. इसलिए हमें हमेशा सकारात्मक ही सोचना चाहिए, क्योंकि सोच का हमारे जीवन पर 100 प्रतिशत असर पड़ता है. हम सब आत्माओं के पिता परमात्मा शिव है जो कि निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप है. उनको याद करने से हम अपनी एकाग्रता को बढा सकते है, साथ ही सभी बच्चों को योग एवं ध्यान का जीवन में महत्व बताते हुए राजयोग ध्यान की अनुभूति भी कराई और बच्चों को खूब पढ़ने और आगे बढ़ने के साथ साथ सभी को नशामुक्त रहने, स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने के साथ साथ मास्क लगाने एवं दो गज दूरी बनाये रखने के लिए प्रेरित किया.
कुशल संचालन ओ.पी. दीक्षित ने किया तथा सभी का आभार सूरज मनकेले द्वारा किया गया.
