जुनैद काकर, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

ज़िला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही बरतने के कारण कोविड-19 रोगी मालती नेहते की गत वर्ष जिला अस्पताल के शौचालय में गिरकर मृत्यु हो गई थी। मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने शुक्रवार को न्यायालय में अस्पताल प्रशासन को दोषी ठहराते हुए पीड़ित परिवार को पाँच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया है।
10 जून को जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमण पीड़ित मालती नेहते का शव 7 दिनों के बाद सड़ी अवस्था में अस्पताल के शौचालय से बरामद हुआ था। बीमारी से पीड़ित महिला अस्पताल से सात दिनों से लापता थी, दुर्गंधी से उनकी मौत शौचालय में होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ था।
जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ लोकसंघर्ष मोर्चा की प्रतिभा शिंदे, कमलाबाई देवीदास भिड़े और रफीक तडवी ने औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर कर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में संविधान की अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हुआ है, मलतीबाई नेहते के वारिसों को फैसले से 4 महीने के भीतर मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया जाए। घटना की जांच के लिए नियुक्त तीन सदस्यीय समिति और जिला कलेक्टर जलगांव द्वारा दायर जांच रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य सचिव दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें।
आदेश पारित करते हुए न्यायालय ने यह भी कहा कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जनस्वास्थ्य अभियान और अन्य मामले दिनांक 12 जून 2020 का आदेश और दिनांक 1 जून 2020 को सिटीजन फॉर्म फॉर इक्वैलिटी बनाम महाराष्ट्र सरकार तथा 18 अगस्त 2020 सूमोटो क्रिमिनल पीआईएल क्र 1/2020 (रजिस्ट्रार ज्यूडीसीयल मुंबई उच्च न्यायालय अधिकार क्षेत्रातील औरंगाबाद खंडपीठ विरुद्ध भारत सरकार), इस मामले में दिए गए सभी निर्देशों का पालन किया जाए जिसकी याचिकाकर्ता ने किया है, उसका पालन करने के भी आदेश औरंगाबाद खंड पीठ न्यायमूर्ती श्रीकांत डी, कुलकर्णी व एस. व्ही. गंगापुर वाला ने दिए हैं।
