भोपाल में ज़ीनत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित आयुष्मान एवं सीएमएच हॉस्पिटल बना गरीबों के लिए मसीहा | New India Times

अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल में ज़ीनत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित आयुष्मान एवं सीएमएच हॉस्पिटल बना गरीबों के लिए मसीहा | New India Times

भोपाल के अशोका गार्डन में ज़ीनत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित आयुष्मान एवं सीएमएच हॉस्पिटल इस वक़्त गरीबों के लिए मसीहा बना हुआ है। हॉस्पिटल में तैनात ड्यूटी डॉक्टर मुबीन रहमान ने NIT सवांददाता से बात करते हुऐ कहा कि एक लाचार, गरीब , मरीज़ पिछले दिनों मर्सी मेडी- कॉग्निशन कंसल्टेंसी के तहत सीएमएच हॉस्पिटल में आया जिसके पीठ में लगभग 3 किलो 300 ग्राम का हेमिजियोमा ट्यूमर था। उस मरीज़ की माली हालत को देखते हुए डॉक्टर फ़ज़ल के संज्ञान में केस रेफर किया गया, जिसके बाद खुद फ़ज़ल साहब ने आयुष्मान कार्ड बनवाकर आयुष्मान हॉस्पिटल में एडमिट करने के निर्देश दिए। मरीज़ का मेडिकल फिटनेस बनाने के बाद कंसल्टैंट डॉक्टर राधिका शर्मा ने सर्जन डॉक्टर मनोहर मालवीय के साथ एक कमियाब सर्जरी कर नय साल में नई ज़िंदगी अता की।

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आज पूरी तरह स्वस्थ होकर मरीज़ अपने घर जा रहा है। आप को बता दें कि जब कोरोना वायरस से डरे हुए लोग घरों के भीतर कैद हो गए थे तब मर्सी मेडी- कॉग्निशन के संचालक डॉ.मुबीन एम.रहमान ने इस चुनौती के सामने अपने घुटने नहीं टेके। वह निरंतर मानव हित के लिए अपनी फ़्री सेवाएं देते रहे ।जिस के लिए कई संस्थाओं ने कोरॉना वॉरियर्स के अवॉर्ड से सम्मानित किया था।अब ज़ीनत चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ मानो सेवाओं में चार चांद लगाने में लगे हैं। उन्हों ने कहा कि मुसीबत के वक्त में किसी के काम आना, उसकी मदद करना ही हमें सच्चे मायनों में इंसान बनाता है।

भोपाल में ज़ीनत चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित आयुष्मान एवं सीएमएच हॉस्पिटल बना गरीबों के लिए मसीहा | New India Times

समाज के लिए कुछ करना सौभाग्य की बात होती है। मज़हब इस्लाम हमें यह शिक्षा देता है कि बिना भेद भाव किए समाज सेवा करनी चाहिए। समाज सेवा करने में दिली सुकून मिलता है। संस्था की तरफ से समाज सेवा के क्षेत्र में आगे भी कार्य किए जाते रहेंगे। हर सबल व्यक्ति को ग़रीबों की सेवा में आगे आना चाहिये।वहीं मरीज़ के परिजन का कहना था कि ऑप्रेशन के पहले तक तो ऐसा लगता था यह (मरीज़) अब कोई काम का नहीं है।पहले तो खुद से उठकर चल भी नहीं सकते थे।
3 किलो का बड़ा सारा मास पीठ में ऐसा दिखता था मानो किसी ने बड़ा सा पत्थर बांध दिया हो।जिस से दिनचर्या के कामों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उसके इलावा ,लोगों की नज़रों में भी मरीज़ नकारा सा लगता था, इस ऑपरेशन ने इसे नई ज़िन्दगी दे दी है। आयुष्मान हॉस्पिटल की इस उपलब्धि को लेकर दूसरे मरीजों में भी उम्मीद की किरण नज़र आ रही है।
दुआ है कि यह हॉस्पिटल हॉस्पिटल खूब तरक्की करे।
वहीं डाॅ.फ़ज़ल उर रहमान (डायरेक्टर,ज़ीनत ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल )का कहना है कि हम जब ऐसे बेसहारा मरीजों को देखते है तो लगता है हमारे ट्रस्ट के मकसद को हम पहुंच रहे हैं।हमारे तीनों अस्पताल में आप देखेंगे कोई ना कोई गरीब मरीज़ फ़्री इलाज लेता मिल जाएगा या ज़्यादातर मरीज़ आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करवाते नज़र आएंगे।यह कामियाब सर्जरी हमारे लिए अनोखी ज़रूर है पर नई नहीं है और हमारा अगला टारगेट अनाथ बच्चो के लिए यतीम खाना और नशा मुक्ति केंद्र खोलने का है।

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