वनविभाग के अधिकारियों की लापरवाही से सूखे लाखों वृक्ष, वृक्षारोपण के नाम खर्च करोड़ों रुपये मिल गए मिट्टी में | New India Times

श्रीकांत पुरोहित, देवास ( मप्र ), NIT; ​वनविभाग के अधिकारियों की लापरवाही से सूखे लाखों वृक्ष, वृक्षारोपण के नाम खर्च करोड़ों रुपये मिल गए मिट्टी में | New India Timesएक ओर जहां प्रदेश सरकार हर वर्ष वन परिक्षेत्रों में वृक्षों की संख्या बढाने ने के लिए  करोड़ो रुपये खर्च कर रही है वहीं वन विभाग की उदासीनता व लापरवाही के कारण वृक्ष सूखते जा रहे हैं।

 वृक्षारोपण व देखभाल की जिम्मेदारी वनविभाग को सौंपी गई है, उसी के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये मिट्टी में मिल रहा हैं।

  • जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पेड़ सूखे

वन परिक्षेत्र बागली, जिसमें जिम्मेदारो की लापरवाही के चलते सरकार की मंशा अधुरी नजर आ रही है। बागली वन विभाग परिक्षेत्र में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर बारिश के समय जंगल में प्लांटेशन के नाम पर हजारों की संख्या में वृक्षा रोपण किया जाता है, लेकिन वृक्षारोपण कर जिम्मेदार उन्हें भुल जाते हैं ओर देखभाल के अभाव में वृक्ष सुख जाते हैं।

  • 8 हजार पौधों में से 48 पौधे भी जिवित नहीं

वर्ष 2015-16 में म. प्र. शासन वन विभाग मिश्रित वृक्षा रोपण चेनपुरा कृक्ष क्र. 833 में रकबा 48.170 भूमि में 48 हजार 170 पौधे का रोपण किया गया था। लेकिन आज की स्थिति देखी जाए तो उक्त भूमि पर 48 हजार पौधों में से 48 पौधे भी जीवित नहीं मिलेंगे,  जोकी जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करती है। जानकारी के अनुसार पौधारोपण के बाद पौधों की देख भाल व सुरक्षा के लिए लाखों रुपए आते हैं लेकिन उक्त राशि से पौधों का तो सरक्षण नहीं हो रहा है या फिर जिन अधिकारी व कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई थी उनका सरक्षण जरूर हुआ है। इस संबंध में बागली वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से उक्त पौधारोपण में लगी राशि एवं शासन द्वारा स्वीकृत हुई राशि  की जानकारी लेना चाहिए लेकिन जिम्मेदार उक्त राशि की जानकारी नहीं दे पाए। इससे स्पष्ट होता है कि जिम्मेदार अपने कर्तव्य के प्रति कितने सक्रिय हैं। इस प्रकार वन विभाग बागली परिक्षेत्र में कई जगह लाखों रुपए खर्च कर पौधे लगाए गए हैं लेकिन उक्त पौधों का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।

जिम्मेदार का कहना है:-

833 कक्ष क्र. में किए गए पौधारोपण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई थी व कितनी लागत लगी है इसकी जानकारी मुझे नहीं है: राजाराम परमार, एसडीओ, वनविभाग बागली, देवास।

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