मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले में पुलिस द्वारा की गई वकील की पिटाई का मामला राष्ट्रीय स्तर पर बना मुद्दा, दोषी पुलिस कर्मी हुआ निलंबित | New India Times

अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले में पुलिस द्वारा की गई वकील की पिटाई का मामला राष्ट्रीय स्तर पर बना मुद्दा, दोषी पुलिस कर्मी हुआ निलंबित | New India Times

मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले में पुलिस ने महज़ एक वकील की इसलिए पिटाई कर दी क्योंकि वह हुलिये से मुसलमान लग रहा था। पुलिस जैसे विभाग में अगर साम्प्रदायिक नजरिया फैल जाए तो यह और भी चिंता करने वाली बात है। अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में पुलिस का कार्य विशेष महत्वपूर्ण होता है। समाज में कानून और व्यवस्था को बनाये रखना, सशक्त से अशक्त की रक्षा करना, उनका कानूनी ही नहीं नैतिक दायित्व भी है पर कानून और वयवस्था के नाम पर कभी-कभी कुछ कर्मचारी रक्षक के स्थान पर भक्षक बन जाते हैं। जिस से पुलिस की छवि खराब होती है।
पुलिस का कर्तव्य है कि वह बिना भेदभाव के हर कर्तव्यनिष्ठ नागरिक की सहायता और सुरक्षा करे। पुलिस व्यवस्था को आज नई दिशा नई सोच और नए आयाम की आवश्यकता है। समय की मांग है कि, हमारी पुलिस नागरिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों के प्रति जागरूक हो और समाज के सताए हुए तथा दबे कुचले लोगों के प्रति संवेदनशील बने। 
गौरतलब है कि 23 मार्च को दीपक बुंदेले नाम के एक वकील को बैतूल पुलिस ने उस समय बेरहमी से पीटा था, जब वह इलाज के लिए जिला अस्पताल जा रहे थे. आरोप है कि अब एक महीने बाद पुलिस उन पर दबाव डाल रही है कि वह अपनी शिकायत वापस ले लें।

मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले में पुलिस द्वारा की गई वकील की पिटाई का मामला राष्ट्रीय स्तर पर बना मुद्दा, दोषी पुलिस कर्मी हुआ निलंबित | New India Times

बुंदेले के मुताबिक उनका बयान लेने आये पुलिस अधिकारियों ने अपने बचाव में कहा कि उनकी गलती से पिटाई हो गई क्योंकि उन्हें लगा कि वह मुस्लिम हैं।बुंदेल के मुताबिक 23 मार्च की शाम जब वह अस्पताल जा रहे थे तब पुलिस ने उन्हें रोका था. उन्होंने कहा, ‘तब देशव्यापी लॉकडाउन लागू नहीं हुआ था, लेकिन बैतूल में धारा 144 लागू कर दी गई थी. मैं पिछले 15 वर्षों से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का मरीज हूं. चूंकि मैं ठीक महसूस नहीं कर रहा था, तो मैंने सोचा कि अस्पताल जाकर कुछ दवाइयां ले लूं।लेकिन मुझे पुलिस ने बीच में ही रोक लिया.’बुंदेले ने पुलिस को समझाने की कोशिश की कि उन्हें यह दवाइयां लेनी बहुत जरूरी हैं लेकिन उनकी बात को सुने बिना एक पुलिस वाले ने उन्हें थप्पड़ मारा.बुंदेले ने कहा, ‘मैंने उनसे कहा कि उन्हें संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए और यदि पुलिस को सही लगता है तो वह धारा 188 के तहत हिरासत में लिए जाने को तैयार हैं. यह सुनकर पुलिसकर्मियों ने अपना आपा खो दिया, और मुझे एवं भारतीय संविधान को गाली देने लगे।कुछ ही समय में कई पुलिसवाले आ गए और मुझे लाठी से पीटना शुरू कर दिया.’जब उन्होंने बताया कि वे वकील हैं, उसके बाद पुलिस ने उन्हें पीटना बंद किया. बुंदेले ने आरोप लगाया, ‘लेकिन तब तक मेरे कान से काफी खून बहने लगा था.’उन्होंने अपने दोस्त और भाई को बुलाया और बाद में वे अस्पताल गए. वहां पर उन्होंने अपनी मेडिको लीगल केस (एमएलसी) बनवाया. इसके बाद 24 मार्च को उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक डीएस भदौरिया और राज्य के पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के पास शिकायत दर्ज कराई।उन्होंने मुख्यमंत्री, राज्य के मानवाधिकार आयोग, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और शीर्ष सरकारी अधिकारियों को भी इस शिकायत की प्रतिलिपि भेजी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तब से पुलिस शिकायत वापस लेने के लिए बहुत कोशिश कर रही है।उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले कुछ शीर्ष अधिकारियों ने मुझसे कहा कि अगर मैं अपनी शिकायत वापस ले लेता हूं तो वे इस घटना की निंदा और माफी मांग सकते हैं. बाद में कुछ लोगों ने कहा कि अगर मैं चाहता हूं कि मेरा भाई शांति से लॉ की प्रैक्टिस कर पाए तो मुझे अपनी शिकायत वापस ले लेनी चाहिए.’हालांकि वकील दीपक बुंदेले पीछे नहीं हटे. 24 मार्च को दायर अपनी शिकायत में उन्होंने मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. इस आधार पर 17 मई को कुछ पुलिस वाले उनके घर पर उनका बयान दर्ज करने आए। इसी समय पुलिस ने उनसे कहा कि उनकी पहचान करने में गलती हो गई, पुलिसवालों को लगा कि वे मुस्लिम हैं।बुंदेले ने कहा, ‘वैसे तो मेरा बयान लेने में पांच मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए था लेकिन यह काम करने में करीब तीन घंटे बीत गए क्योंकि पुलिसवाले लगातार कोशिश करते रहें कि मैं अपनी शिकायत वापस ले लूं बुंदेले द्वारा NIT को भेजी गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग के मुताबिक कथित तौर पर पुलिसवाले कह रहे हैं कि उनकी पिटाई गलती से हो गई क्योंकि उन्हें लगा कि वे मुस्लिम हैं क्योंकि उनकी बड़ी दाढ़ी थी. इसके आगे उन्होंने कहा कि दंगों के समय आमतौर पर पुलिस हिंदुओं का समर्थन करती है.कथित तौर पर पुलिसवाले को ये कहते हुए सुना जा सकता है, ‘हम उन पुलिसकर्मियों की ओर से माफी मांगते हैं. इस घटना के कारण हम वास्तव में शर्मिंदा हैं. यदि आप चाहें तो माफी मांगने के लिए मैं उन अधिकारियों को ला सकता हूं.’ उन्होंने कहा कि वे अपनी शिकायत वापस नहीं लेंगे. हालांकि अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है.उन्होंने कहा, ‘वैसे तो पुलिस ने मुझसे माफी मांग ली है। यदि मैं मुसलमान होता भी तो पुलिस को किसने इजाजत दी है कि बिना किसी कारण के वे प्रताड़ित करें।
आडियो के सामने आने के बाद एसपी श्री डीएस भदौरिया ने एएसआई के एस पटेल को निलंबित कर दिया है।

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