अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT; 
राजस्थान के मुस्लिम समुदाय में ऐसे अनेक परीवार हैं जिनमें फौज व शिक्षण सेवा के कार्ये पीढी दर पीढी करते आ रहे हैं, लेकिन कुछ परीवार ऐसे भी हैं जो सिविल सेवा के पीढी दर पीढी अधिकारी बनकर समाज व देश की सेवा आज भी करते हुये आने वाली पिढी को राह दिखाने में लगे हैं।
हालांकि राजस्थान में ऐसे भी काफी गुदड़ी के लाल अधिकारी बन चुके हैं जिनके परीवार की हालत अनुकूल नहोने के बावजूद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन व इच्छा शक्ति के बल पर आज अधिकारी बनकर कर्तव्यनिष्ठा के साथ बडे कठिनाई भरे मार्ग को भी सरलता के साथ तय करते हुये अच्छे अधिकारी की छवि बनाकर प्रदेश में अपना अलग मुकाम बनाकर सेवा को अंजाम दे रहे हैं।
राजस्थान प्रदेश गठित होने के बाद आजाद भारत में पहले राजस्थान न्यायीक सेवा परीक्षा को पास करके न्यायीक अधिकारी बनने वाले जो बाद में राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टीस भी रहे मोहम्मद असगर अली चोधरी के बाद उनके पुत्र मुजफ्फर चोधरी आज अतिरिक्त जिला जज व जस्टीस यामीन अली की पुत्री नुशरत बानो भी अतिरिक्त जिला जज हैं। इसी तरह इनके बाद राजस्थान न्यायीक सेवा मे चयनीत होकर हाई कोर्ट जस्टीस रहे भवंरु खान के पिता मरहुम बक्सू खां पहले स्टेट टाइम में फिर आजादी के बाद प्रदेश बनने पर आला पुलिस अधिकारी रहे थे। वही उधके पुत्र इकबाल खान आज राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सीनियर अधिकारी हैं। दुसरी तरफ राजस्थान स्टेट में पोस्टेड भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशफाक हुसैन की बेटी फराह हुसैन ने पिछली भारतीय सिविल सेवा परीक्षा को 267 वीं रेंक से पास करके अब भारतीय आयकर विभाग की आला अधिकारी पद पर फाइज है। इससे पहले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के बेटा मलिक का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हो चुका है। पुलिस सेवा में आई जी पद से रिटायर्ड अधिकारी लियाकत अली खां का पुत्र शाहीन अली राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पद को शुसोभित कर रहे हैं। इससे पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे बूंदी निवासी अलाऊद्दीन खिलजी के पुत्र कमालुद्दीन खिलजी भी राजस्थान प्रसाशनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी फिरोज अहमद सिंधी साहब के पुत्र भी राजस्थान प्रसाशनिक सेवा के अधिकारी हैं। इसके अतिरिक्त जोधपुर के एक इंजिनियर की बेटी व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ऐ.आर खान की पुत्र वधू मरहुम अजरा परवीन भी अल्प समय राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रहते हुये अपने अल्प सेवा काल मे ऊंचे मुकाम हासिल करने के बावजूद वो हमें छोड़कर चली गईं, जिन्हें राजस्थान हमेशा याद करता रहेगा।
हालांकि राजस्थान के इन परम्परागत अधिकारी देने वाले परिवारों के अलावा अनेक गुदडी के लाल भी यहां मौजूद हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत व लगन के साथ इच्छा शक्ति के बल पर वो अधिकारी बनने में सफल होकर आज सेवा काल में शानदार इमानदाराना व कर्तव्यनिष्ठा के कारण अपना अलग से मुकाम बनाये हुये हैं। भारतीय पुलिस सेवा में हैदर अली जैदी व तारिक आलम, राजस्थान प्रशासनिक सेवा में डा.शमशुद्दीन खान, अबरार अहमद, यू डी खान, जमील अहमद कुरेशी, सईद खान, सत्तार खान, असलम शेर खान, अकील अहमद, फुरकान अहमद,अबू सुफियान, शोकत अली खान, मुकर्रम शाह, हाकम खान, फतेह मुहम्मद, सना सिद्दिकी, सलीम खान, असलम मेहर, नसीम खान, अबू बक्र, नीसार अहमद, कमरुद्वदीन, जावेद खान, रियाज उस्मानी, शीराज अली जैदी सहित करीब पच्चास अधिकारी अपने कर्तव्यनिष्ठा का लोहा मनवा कर वतन की खिदमत को अंजाम देने मे कार्यरत है। दुसरी तरफ राजस्थान पुलिस सेवा के अरशद अली,इरशाद हुसैन,अताउर्रहमान, मुस्तफा जैदी, नाजिम अली खान, नशीबुल्लाह खान, मुमताज खान, नवाब खान,आस मोहम्मद,आहद खान,न्याज मोहम्मद,अय्यूब खा चूरु,अय्यूब खा बाली, महमूद खान, शब्बीर खान, इस्माइल खान जैसे अनेक अधिकारी अपने इंसाफाना कार्य करने की बदोलत जनता व सरकार के चहते अधिकारी बने हुये हैं। इन सबसे अलग भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सलाऊद्दीन अहमद साहब मुख्य सचिव बनकर रिटायर हुये हैं। वहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अन्य दो अधिकारियो मे से एक कमरुल जमा चोधरी उदयपुर मे पोस्टेड है तो दुसरे अतर अमीर को स्टेट अलाट हुवा है। मोहम्मद हनीफ खान IAS रेवेन्यू बोर्ड मेम्बर है। ऐ.आर खान व एम.एस खान रिटायर हो चुके हैं। साथ ही जे एम खान व स्टेटस के मर्ज होने पर स्टेट सेवा के आधार पर राजस्थान मे बने 6 मुस्लिम IAS इंतकाल फरमा चुके हैं।
इसी के साथ भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मुराद अली अब्रा,निसार अहमद व सरवर खान IGP पद से व हबीब खान गोरान IPS राजस्थान लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष पद से रिटायर्ड होकर समाज हित से कार्य कर रहे है। तो न्यायीक सेवा के अधिकारियो का जिक्र मैं यहां नहीं कर रहा हूं। इनके अलावा राजस्थान एकाउंट्स सेवा के आला अधिकारी जाकीर हुसैन, एस.जेड. शाहिद व ऐजाज नबी खान सहित अनेक अधिकारी भी इस सेवा में कार्यरत हैं।
कुल मिलाकर यह है कि ऐसे अनेक गुदड़ी के लाल जो आला अधिकारी बनकर या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर सेवा में कार्यरत हैं। उनके नामों का उल्लेख मैं यहां नहीं कर पाया हूँ, लेकिन उन सबकी मेहनत व हौसले को सलाम करते हुये उनसे उम्मीद करते हैं कि वो इस सिलसिले को आगे बढाते रहेंगे।
