नोट बन्दी को आज एक महीना पूरा परन्तु न तो बैंक के सामने लाईन कम हुई और न जनता की समस्या कम हुई: इक़बाल सिद्दीकी  | New India Times

शारिफ अंसारी, मुंबई, NIT; ​नोट बन्दी को आज एक महीना पूरा परन्तु न तो बैंक के सामने लाईन कम हुई और न जनता की समस्या कम हुई: इक़बाल सिद्दीकी  | New India Timesमहाराष्ट्र कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव इक़बाल सिद्दीकी ने आज एक पत्रकार वार्ता में कहा कि नोट बन्दी को आज एक महीना पूरा हो गया । परन्तु न तो बैंक के सामने लाईन कम हुई और न जनता की समस्या कम हुई । भृष्टाचार चरम सीमा पर पहुच गया बैँक के मैनेजर और बीजेपी के नेता लाखों करोड़ो की नई नोट के साथ पकड़े जा रहे हैं । जनता पैसे पैसे को मोहताज है सरकार भृष्टचारियों और खुद के नेताओं पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रही है ।

मोदी सरकार के साथ साथ महारष्ट्र की प्रदेश सरकार भी नोट बन्दी से होने वाली समस्या को सुधारने में असफल रही है । सरकार ने बिना किसी तैयारी के संविधान , संसद और देश की जनता सम्मान न करते हुए तानाशाही फैसला किया है । ऐसा लोकतंत्र में कभी किसी ने नही देखा । 

विपक्ष जब जनता की आवाज़ सरकार तक पहुचाने का कार्य कर करती है तो विपक्ष पर ही बेतुके आरोप लगाए जा रहे जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक है ।इक़बाल ने आगे कहा कि एक महीने में न बैंको के सामने लाईन में कमी आई न ही जनता को खुद का पैसा निकालने को मिल रहा है । अधिकांश बैंक और एटीएम में समय से पहले ही कैश नही है की नोटिस चिपका दी जाती हैं ।। सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है कि लाखों करोड़ों जमा हो गया । लेकिन सरकार ये नही बता रही है देश का नुकसान कितना हुवा । नोट बन्दी से छोटे बड़े सभी कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ा है कारोबार होता है तो विभिन्न प्रकार के टैक्स सरकार को मिलते है जो शुद्ध रूप से सरकार की आय होती है । सरकार ने टोल माफ़ किया है नोट न होने के कारण रजिस्ट्री विभाग से सरकार को रोज़ होने वाली आय बुरी तरह प्रभवित हुई है । जिसकी वजह से देश का विकास ही प्रभावित नहीं होगा बल्कि हम 25 साल पीछे चले जायेंगे ।

इक़बाल ने कहा कि सरकार जिस डिपॉजिट मनी की बात कह कर अपनी पीठ थपथपा रही है वो बैंको में जमा पैसा देश की जनता का है न कि सरकार का । 

नोट बन्दी और कैश न मिलने के कारण सबसे ज़्यादा नुकसान रोज़ काम रोज़ पगार वाले मज़दूर का हुवा है । मज़दूर को काम नही मिल रहा काम मिल जाये तो मालिक पगार कहाँ से दे बैंको में निर्धारित राशि ही मुश्किल से मिल रही है । भिवंडी शहर के अधिकांश लूम कारीगर शहर छोड़ चुके हैं । सरकार से इस फैसले से मध्यम और गरीब वर्ग भुखमरी के कागार पर खड़े है । जनता इस सरकार को कभी माफ नही करेगी ।

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