नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

Covid 19 कोरोना ने दुनिया को पूरी तरह से ठप कर दिया है, विश्व समुदाय ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। कल तक आतंकवाद, हिंदू-मुस्लिम, पाकिस्तान, ट्रिलियन-बिलियन वाली अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर स्टूडियो फ्रेमवर्क करने वाले चैनल्स और अखबार तक कोरोना को लेकर वैज्ञानिक डिबेट्स चलाने लगे है जो कि इंसानियत के लिए अच्छी लेकिन प्रासंगिक बात है। भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 100 से अधिक हो गई है। महाराष्ट्र में कोरोना के कारण एक की जान जाने की पुष्टि की गई है। इसी दौरान मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण हुई ओलावृष्टि से राज्य के कई जिलों में रबी की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। बीते पांच सालों से चल रही फडणवीस सरकार की अदभुद कर्ज माफी से परेशान किसानों को उद्धव ठाकरे नीत महाविकास आघाडी सरकार ने 4 महीनो के भीतर 2 लाख रुपयो तक के ऋण माफी का फैसला लेकर फौरी राहत दी है अब रबी के उक्त नुकसान के भुगतान को लेकर भी जरूरी कदम उठाए जाने हैं। कोरोना और ओलावृष्टी इस दोहरी आपदा में फंसे लोगों के बीच नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। पूर्व मंत्री गिरीश महाजन अपने निर्वाचन क्षेत्र के किसानों से मिले और बारिश से हुए रबी फसलों का मुआयना किया। नेताजी ने विधायक होने के नाते हमेशा की तरह राजस्व के अधिकारियो को तत्काल पंचनामा करने की सुचना की। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जहां राज्य सरकार ने लोगों के इकट्ठा ना होने पर अनुरोध किया है वहीं नेताजी खुद भीड़ में नजर आए। महाजन अपने क्षेत्र में कृषि यात्रा पर थे तब अगस्त 2019 के कोल्हापुर बाढ़ स्थिती के उनके वाटर पिकनिक मामले में उन्हे सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा था। ट्रोलिंग में कोरोना को लेकर ठाकरे सरकार की सजगता की सराहना की जा रही है। सोशल मीडिया के कारण भारत का लोकतंत्र तर्कशुद्ध हो गया है। इसी प्लेटफार्म पर अभिव्यक्ति की आजादी का उत्सव प्रतिपल धुमधाम से मनाया जा रहा है। जनता के लिए यह तार्किकता गौरव की बात है। भक्तों के लिए यह दशा शायद अपनी अवधारणा को मजबूती से उबारने की हो सकती है। नेताओ के कथित प्रासंगिक बयान उनकी भूमिका का आंकलन लोग अपनी उंगलियों की हरकतों से मोबाइल पर करते देख हर किसी मतदाता को अपने नागरिक होने पर अवश्य गर्व होना चाहिए। जामनेर तहसिल के तालेगांव, शाहपुरा, पिम्पलगांव, फत्तेपुर, तोंडापुर, कुंभारी समेत दर्जनो गांवों में हुई अकाल बारिश से गेहूं, मकई, चने की फसलों को क्षति पहुंची है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मार्च महीने में इस तरह की बारिश इतनी मात्रा में होना खतरनाक है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 2007 – 08 से अब तक इस तरह की वर्षा से भारतीय किसानी का 45 लाख करोड़ तक का नुकसान हो चुका है। सरकारें स्वामीनाथन आयोग की बातें करती हैं चुनाव में किसानों के वोट बटोरती हैं लेकिन उसे लागू नहीं किया जाता। कल तक सत्ता पक्ष में रहा विपक्ष इसी स्वामीनाथन आयोग को लेकर सरकार से भीड़ सकता है लेकिन उसके लिए विपक्ष की आंतरिक परिपाटी शुद्धतम होनी चाहिए। कोरोना की बात करें तो क्षेत्र में कोरोना से किसी भी पीड़ित के होने की कोई खबर नहीं है। सरकार और प्रशासन के साझा प्रयासों के चलते गांव कस्बों तक कोरोना को लेकर किए गए प्रचार प्रसार का बेहतर परिणाम नजर आ रहा है। लोग स्वयं अनुशासित नागरिक की तरह सरकार के दिशा निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं।
