ताहिर मिर्ज़ा, उमरखेड (महाराष्ट्र), NIT;
इस समय पूरे देश में शादियों को काफी मंहगा कर दिया गया है। एक तरफ दहेज की लानत, दूसरी तरफ शादी में तामझाम और फिजूलखर्ची, गरीब परिवार इसमें में पिस रहा है। कहीं लडकियां बिन ब्याही बैठी रह जाती हैं तो कहीं दहेज़ के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठती हैं। ऐसे में देश में लगभग सभी धर्मों व समाज में कई समाजिक संगठन काम कर रहे हैं जो गरीब व बेसहारा लड़कियों की शादी के लिए सामूहिक विवाह समारोहों का आयोजन करते रहते हैं। इन का यह काम गरीब व बेसहारा लड़कियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
महाराष्ट्र के उमरखेड शहर की सामाजिक संस्था के ज़रिए पिछले 12 से 13 सालों से मुस्लिम समाज के गरीब वर्ग के के लोगों के लिए सामूहिक विवाह समारोहों का अयूजन किया जाता रहा है, जिससे समाज में अनेक ऐसे लडकियों को शादी के पवित्र बंधन में बंध जाने का मौका मिल रहा है जिन लड़कियों के माता पिता इस दुनिया में नहीं हैं। इस संस्था की और से इस साल भी 7 सामूहिक विवाह का अयूजन किया गया था। इस समारोह को सफल बनाने में मेळावा समेती के अध्य्क्ष ज़मीर खान, उपाध्यक्ष समीर अहमद, सैय्यद तजम्मुल, अब्दुल करीम शाह, एजाज़ कुरैशी, बाबू हीना, तस्लीम अहमद, गाज़ी असर ने अपना सहियोग दिया तथा इस कार्यक्रम में शहर के सामाजिक, राजनीतिक छेत्र के सभी लोग मौजूद थे तथा हज़ारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद थे।
