वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

नववर्ष 2020 की प्रथम सन्ध्या पर नगर की साहित्यिक संस्था “प्रज्ञालोक” के तत्वावधान में एक काव्यसन्ध्या का आयोजन ‘निश्छल-निकुञ्ज’ में किया गया, जिसमें उपस्थित सभी कवियों व शायरों ने काव्यांजलि अर्पित करके नववर्ष का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रामप्रकाश भारद्वाज ‘सरस’ ने तथा संचालन सुकवि राजकिशोर ‘राज’ ने किया।
श्रीकान्त निश्छल द्वारा प्रस्तुत वाणी-वन्दना के माध्यम से माँ शारदे से याचना की गयी—
‘जीवन का आँगन है मैला,
चारों ओर अँधेरा फैला।
दिव्य ज्ञान की ज्योति जला दो।
मुझको मेरी राह दिखा दो।।’
बी के सतीश ने शुभकामना सन्देश पढा——–
‘नित्य प्रति आनन्दमय, सहयोग हो सद्भावना।
पथ-भ्रमित कोई न हो, सीधी सरल हो साधना।
रीति का प्रभु-प्रीति का, सबके हृदय में वास हो,
ज़िन्दगी खुशहाल हो, बस है यही शुभकामना।’
गंगा-जमुनी तहजीब के मशहूर शायर अयाज़ इशरत ने अपनी शिकायत कुछ यों दर्ज करायी—-
‘भागा अंग्रेज हिन्दोस्तां से है जब-
हिन्दू-मुस्लिम ने अपना किया हक़ अदा।
बात मिल्लत की हमने हमेशा कही,
फिर भी चलता है ‘इशरत’ भदाभद गदा।’
शिक्षक रचनाकार सुखदेव मिश्र ने सभी का इस प्रकार आह्वान किया—–
‘ज़िन्दगी पावन बना लें, स्वयं से हम प्यार कर लें।
आओ नये इस साल में हम, स्वयं का उपचार कर लें।
है अगर मन में उदासी तो नया अहसास क्या है ?
हटाकर दुर्बलता को नयी शक्ति का संचार कर लें।’
समाज सेवी रचनाकार गोविंद गुप्ता ने नववर्ष में भारतवर्ष के उत्कृष्टता की कामना करते हुए उद्घोष किया—-
‘आया है नववर्ष, होगा भारत का उत्कर्ष।।
इस सारे ब्रह्मांड में बढ़े देश का मान,
जन-जन की आकांक्षा भारत बने महान।
आया है नववर्ष, होगा भारत का उत्कर्ष।।’
‘यह नववर्ष हमारा नहीं है’- ऐसा कहने वालों से गोविंद गुप्ता का कहना था —-
‘लोग कहते हैं,
यह नववर्ष हमारा नहीं है, चलो मान लेते हैं।
तारीख मत बदलो, खाते की,
बच्चों के जन्म और पुरखों की मृत्यु की।
कौवा कान ले गया, यह जान लेते हैं,
यह नववर्ष हमारा नहीं है, चलो मान लेते हैं।’
श्रेष्ठ गीतकार राघव शुक्ल ने अपने गीत की इन पंक्तियों के माध्यम से अपनी सुदृढ सकारात्मक सोच का परिचय दिया–
‘चाहे हमको करो तिरस्कृत,
अपनाओ या गले लगाओ,
हम गुलाब हैं खुशबू देंगे,
हम पर फ़र्क नहीं पड़ना है।’
शायर विपिन सोहल ने समाज मे फैली अराजकता पर दुख व्यक्त करते हुए पँक्तियाँ पढ़ीं—
‘हुजूम है, भीड़ है, तमाशा है,
आदमी खून का ही प्यास है।’
कवि/रचनाकारों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा–
‘गिरा बड़ा वकार, जब-जब गिरी कलम है,
कहाँ बचा है मयार, जब-जब बिकी कलम है।’
वरिष्ठ कवि कमलेश शुक्ल ने देशभक्ति की पँक्तियाँ पढ़ कर सीमा पर डटे वीर सैनिकों की सराहना की—-
‘देश से बढ़ कर न दूजा धर्म है,
देश-रक्षा पुण्य पावन कर्म है।
जानते वे जो हिमालय पर डटे,
ज़िन्दगी का क्या अनोखा मर्म है।’
छंदों के श्रेष्ठ रचनाकार आकाश त्रिपाठी ने मोहमदी के मुख्य चौराहे पर स्थित एक अद्भुत संयोग पर सामाजिक समरसता को उद्घाटित करती हुई पँक्तियाँ कुछ इस प्रकार पढ़ीं——–
“गुम्बद हैं गुरुद्वार के, मस्ज़िद की मीनार।
शोभित इनके मध्य में हनुमत का दरबार।
मोहम्मदी में है बना ये सुन्दर संयोग,
बना रहे ईश्वर करे, सब धर्मों में प्यार।”
संचालक राजकिशोर मिश्र ‘राज’ ने सभी को नववर्ष की शुभकामना देते हुए कहा—-
‘पग-पग अमित उत्कर्ष हो।
परिवार में नित हर्ष हो ।
सुख-शान्ति,वैभव से भरा,
दिन-रात नूतन वर्ष हो ।’
संस्थाध्यक्ष श्रीकान्त निश्छल ने नववर्ष की शुभकामना देते हुए ये पँक्तियाँ पढ़ीं——
‘एक समान सभी जन्में हैं, पृथ्वी पर नर-नारी।
कोई साधू-सन्त हो गया, कोई अत्याचारी।
सुखी रहे हर मानव जग में, हो सहयोग परस्पर ;
जीवन हो खुशहाल यही है, शुभकामना हमारी।।’
सभा की अध्यक्षता कर रहे रामप्रकाश भारद्वाज ने नववर्ष में देश की खुशहाली व विकास हेतु कामना कुछ यों की—–
‘हिमगिरि जैसा उच्च हो, भारत माँ का भाल।
हम सबके हिट सिद्ध हो, सुखदायी यह साल।
उन्नत पथ देकर चला, हमको सन उन्नीस।
गगन चूमने को दिया, प्रभु ने ये सन बीस।।’
इसके अतिरिक्त राजबहादुर पांडेय निर्भीक ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।
आकाश त्रिपाठी व संरक्षक कमलेश शुक्ल ने सभी आगन्तुकों का स्वागत एवं आभार जताया।
