जेसीबी से कई गरीबों के अवैध दुकानें एवं ढाबे किए गए जमींदोज, रंभापुर रोड के बड़े नाले पर भी बनी हुई हैं अलीशान बिल्डिंगें जिन पर नहीं हुई कार्रवाई | New India Times

रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:जेसीबी से कई गरीबों के अवैध दुकानें एवं ढाबे किए गए जमींदोज, रंभापुर रोड के बड़े नाले पर भी बनी हुई हैं अलीशान बिल्डिंगें जिन पर नहीं हुई कार्रवाई | New India Times

मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में दोपहर 12 बजे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पराग जैन के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत की गई है। सबसे पहले औद्योगिक विकास निगम कार्यालय के सामने नाहरसिंह का ढाबा, बाफना पब्लिक स्कूल का कटआउट, ए काका टायर वाला, विकास ढाबा, फौजी ढाबा, मामा टायर वाला, आजाद विकलांग संस्था कार्यालय सहित गुमटी और ढाबे पर जेसीबी चलाई गई।
औद्योगिक क्षेत्र में 36 स्थानों का चयन किया गया था जो अवैध रूप से ढाबों का संचालन कर रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इनमें से कई ढाबों में अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। अब यहां सवाल यह उठता है कि इस आशय की शिकायतों पर प्रशाशन ने पूर्व में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

अभियान में तहसीलदार राजेश सोर्ते, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, नगर परिषद मुख्य नगरपालिका अधिकारी विकास डाबर, परिषद कर्मचारी, 42 कोटवार, पुलिस थाना स्टाफ एवं बाहर से आए पुलिस बल, 3 जेसीबी, 2 फायर ब्रिगेड, पानी के टैंकर, औद्योगिक विकास निगम प्रभारी ए के सिंह सहित कर्मचारी अभियान में शामिल थे।
एसडीएम पराग जैन ने बताया मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार जहां अतिक्रमण है उसे हटाया जाएगा।
पिछले सप्ताह नगर परिषद द्वारा मुनादी कर सूचना दी गई थी। कई गुमटी वालों ने स्वेच्छा से हटा ली, जिन्होंने नहीं हटाई उनके खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है। अतिक्रमण अभियान सतत जारी रहेगा।

पीड़ितों ने बताई व्यथा

पीडि़त परिवार नाहरसिंह, दिता डामोर, नाहर सिंह बारिया, वसु भाबोर, रमेश बारिया, राजू सिंगारिया, हक्का मुनिया फतेपुरा, नानू सिंह, कालू मुनिया, वसु मिठिया, विकलांग संस्था के कमलेश राठौर ने बताया कि अब हम बेरोजगार हो गए हैं घर कैसे चलाएंगे, भूखे मरने की स्थिति आ गई है। क्षेत्र की इंडस्ट्री पहले से ही बंद थी, थोड़ा बहुत रोजगार चलता था, जैसे-तैसे घर चल रहा था, अब मुसीबतें सामने आ गई हैं। प्रशासन ने हमारी एक नहीं सुनी। वैसे भी झाबुआ जिले में मजदूरी नहीं मिल रही है, मजदूर पलायन कर रहे हैं। हम बाहर जाएंगे तो बच्चे की पढ़ाई का क्या होगा? लोगों को कर्जा कैसे चुकाएंगे? घर के बड़े बुजुर्गों का कौन ख्याल रखेगा इस तरहा कि बाते बेरोजगार हुए पीड़ित गरीबों ने की है।

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