अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

मतगणना का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है प्रत्याशियों के धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। भाजपा के बागी अनिल गोटे जहां गांव-गांव की सड़कें नापने में लगे हैं तो वहीं एमआईएम के फारूक शाह कार्यकर्ताओं की बैठक लेने में जुटे हैं और जीत का दावा कर रहे हैं। इस बार
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम की पतंग की भी खूब चर्चा में है, ऐसे में यहां के त्रिकोणीय मुकाबले ने समीकरण रोचक बना दिया है। ऐसे में सभी अन्य प्रत्याशी अभी गुमसुम हैं जैसे अब तक कुछ तय हुआ ही नहीं की सुनिश्चित जीत किसकी होगी।
तीन चुनावों से लगातार जीत रहे अनिल गोटे का सीधा मुकाबला हर बार की तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से प्रत्याशी से रहे इस बार निर्दलीय उम्मीदवार कदमबांडे से है।
2014 के त्रिस्तरीय विधानसभा चुनाव में हजार दो हजार वोटों में सिमटने वाली एमआई ने इस बार जोरदार हवा में पतंग उड़ाई है वहीं पर गोटे ने कदमबांडे को तीन बार हराया था इसलिए तभी से दोनों क्षेत्र में चर्चित हो गए इस से भी कुछ लोग नाराज हैं। इस बार फिर दोनों आमने सामने हैं और शिवसेना उम्मीदवार में जोरदार तरीके से बहुसंख्यक आबादी के मतों का विभाजन होने की आशंका जताई जा रही है।

वहीं पर अल्पसंख्यक समुदाय के इलाकों में मतदान के प्रति जबरदस्त अभूतपूर्व उत्साह देखा गया, मतदाताओं ने बिना किसी लालसा से नेताओ की अपील को दर किनार करते हुए हवा में खूब पतंग उड़ाई इस तरह की चर्चा सरे आम सुनाई दे रही है।
धुलिया शहर में मुस्लिमों के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं इसके चलते मुस्लिम इलाकों में इकट्ठा मतदान एएमआईएम को देने की चर्चाएं तेजी से गस्त कर रही हैं और मुस्लिम मोहल्लों में एमआईएम का माहौल नजर आया है।
शिवसेना के हिलाल माली वहीं पर निर्दलीय राजवर्धन कदमबांडे और भाजपा के बागी विधायक अनिल गोटे में जमकर वोटों का विभाजन हुआ है जिसका सीधा लाभ एमआईएम को होने की आशंका शहर में जताई जा रही है। इस बार धूलिया में बड़े उलटफेर हो सकते हैं इस तरह की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है।
