बहराइच जिला सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने अपने प्राइवेट नर्सिंगहोम में दाखिल कर बेहतर इलाज़ के लिए मांगे 10 हजार रुपये, योगी सरकार की सख्ती भी दिख रही है बेअसर | New India Times

फराज अंसारी, बहराइच ( यूपी ), NIT; ​बहराइच जिला सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने अपने प्राइवेट नर्सिंगहोम में दाखिल कर बेहतर इलाज़ के लिए मांगे 10 हजार रुपये, योगी सरकार की सख्ती भी दिख रही है बेअसर | New India Timesएक ओर जहां योगी सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती दिखाई है वहीं सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला बहराइच जिला के सरकारी अस्पताल का सामने आया है जहां सरकारी डॉक्टर ने एक गरीब मरीज को अपने नर्सिंग होम में भर्ती होने के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज करवा दिया जिससे मरीज को बिना इलाज़ कराये अपने घर वापस लौटने पर मजबूर होना पडा।

मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल बहराइच में तैनात डॉ आर के वर्मा ने जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को अच्छे इलाज़ का हवाला देकर अपने नर्सिंग होम में ले जाने के लिए मरीजों पर दबाव बनाकर उन्हें मजबूर कर रहे हैं।

थाना रामगांव अन्तर्गत ग्राम रेहुवा मंसूर निवासी मरीज बहाव वर्ष 25 पुत्र पंचा 26 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था, उसके पैर में गहरी चोट आई है जिसका इलाज़ अस्पताल के डॉक्टर आर के वर्मा द्वारा किया जा रहा है। मरीज से पैर के इलाज़ करने के लिए 1 अप्रैल को सुबह राउंड लेते हये डॉक्टर आर के वर्मा ने उस मरीज से बेहतर इलाज़ के लिए 10 हजार रूपये की मांग की और पीड़ित को जिला अस्पताल से डिस्चार्ज करवा करके पीड़ित को अपना विस्टिंग कार्ड देते हुए अपने प्राइवेट नर्सिंगहोम में भर्ती करने के लिए विवश किया।​
बहराइच जिला सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने अपने प्राइवेट नर्सिंगहोम में दाखिल कर बेहतर इलाज़ के लिए मांगे 10 हजार रुपये, योगी सरकार की सख्ती भी दिख रही है बेअसर | New India Timesडॉक्टर आर के वर्मा ने अपने नर्सिंग होम बेहतर इलाज़ का दावा करते हुए पीड़ित को जिला अस्पताल से जाने को कहा। पीड़ित ग्रामीण क्षेत्र से और अति निर्धन परिवार का है। मरीज ने जिला अस्पताल के हड्डी के डॉ आर के वर्मा से अपनी मजबूरी बयां की और कहा कि डॉ साहब मेरे पास 10 हजार की जगह सौ रूपये भी नहीं है लेकिन डॉक्टर ने मरीज की एक न सुनी और अस्पताल से जाने को कह कर चल दिए।

पीड़ित जिला अस्पताल से बिना इलाज़ कराये अपने घर ग्राम रेहुवा मंसूर जाने को विवश हो गया। पीड़ित ने आरोप ये भी लगाया कि जिला अस्पताल के कई कर्मचारियों द्वारा भी जगह जगह पैसे की मांग की गयी। बिना पैसा लिए कोई सुविधा नहीं दी गयी।

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