नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
जलगांव जिले के एरंडोल में नागपुर राजमार्ग तथा जामनेर तहसील के नेरी में औरंगाबाद राजमार्ग को जोड़ने वाले 40 की.मी के निर्माणाधीन सड़क के काम में लकड़ा ठेकेदार की मनमानी का मामला सामने आ रहा है। राजमार्ग के मध्य से करीब 7 मीटर चौड़ाई तक की सरकारी जमीन पर खड़े दोनों तरफ के पेड़ काटे जा रहे हैं जिसका ठेका किसी एक के नाम से चार व्यक्तियों में बंदरबांट की तरह प्रदान किया गया है। इन ठेकेदारों ने नेरी और पलासखेड़ा मिराचे गांव के बीच में कार्य आदेश के नियम ताक पर रख कर 7 मीटर तक की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए कई पेड़ काट दिए जाने की बात सामने आयी है। गैरकानूनी तरीके से काटे गए पेड़ों की कीमत बाजार मुल्य के अनुसार लगभग 15 लाख तक आंकि जा रही है। इस मामले की पड़ताल अपनी जगह पर इसलिए भी सटीक मालुम पड़ी कि मौके पर पहुंचे सहयोगी पत्रकार द्वारा सच्चाई की समीक्षा की गयी जिसके बाद अधिक जानकारी तथा तकनिकी बिंदुओं के पडताल के लिए ठेकेदार से वर्क आर्डर साक्षात्कार का अनुरोध किया गया लेकिन जवाब में इसकी टोपी उसके सिर वाली भाषा सुनने में आई। रही बात शिकायती पत्राचार की तो प्रशासन द्वारा सूचनाओं की किस तरह से हत्या की जाती आ रही है इसे विस्तार से बताने की शायद आवश्यकता नहीं है। इधर सरकार के प्रतिनिधी जब भी जनता के बीच जाकर विकास गीत गाते हैं तब देशभर में बुने जा रहे सड़कों के जाल वाले काम के मुखड़े को जरा ऊँचे सुर में ही आलापते हैं। बुलेट ट्रेन के लिए काटे जाने वाले 50 हजार मैंग्रो पेड़ों का मुद्दा कोर्ट तक पहुंचा तब इस मामले को लेकर पत्रकारिता के नाम पर बस कुछ लाईनें लिखी गयीं।

सोशल मीडिया से यह विषय कब गायब हो गया किसी को पता भी नहीं चला, यही हाल वर्तमान आर्थिक मंदी की चिंता का होगा क्योंकि चर्चा तो बस 370 और पाकिस्तान को लेकर ही चलाई जा रही है। NHAI और राज्यों के B&C की ओर से चलाई जा रही सड़क परियोजनाओं में ठेकेदारों द्वारा उक्त रुप से लाखों पेड़ गैरकानूनी तरीके से काटे गए होंगे या काटे जा रहे होंगे। प्रशासन को ना कोई जबाबदेही और ना ही पर्यावरण के प्रति किसी प्रकार की संवेदनशीलता नेताओं की अनदेखी के बारे में कुछ आलोचना करना मतलब आलोचना शब्द की गरिमा को चोट पहुंचाने जैसा होगा। एरंडोल – नेरी राजमार्ग निर्माण में हुए कथित पेड़ कटाई कांड की जांच संबंधित विभाग के आंतरात्मा की आवाज से ही होनी चाहिए, अब उम्मीद यही है कि प्रशासन की आंतरात्मा जल्द से जल्द जागृत हो जाए।
