संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

रक्षाबंधन पर्व के साथ श्रवण मास का समापन हो गया। इस रक्षा बंधन पर्व के अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधकर के आजीवन सुरक्षा का वचन पाया और भाइयों ने उनको उपहार भेंट किया वहीं समूचे पन्ना व अमानगंज क्षेत्र में भाई-बहन के स्नेह का पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ साथ ही रक्षा बंधन पर्व के पश्चात कजलियों का पर्व भी बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। भाद्रपद मास की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह कजली पर्व बुंदेलखंड संस्कृति में बड़ा महत्व रखता है। भारतीय बैदिक संस्कृति से जुड़े इस पर्व का बड़ा ही महत्व है। इस लोक पर्व पर घर में बोई गई गेहूं से बनी कजलियों को साफ-सुथरी कर देवी देवताओं को अर्पित कर देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर एक दूसरे को आदान-प्रदान कर मेल मिलाप का सिलसिला शुरू होता है। मानता है कि कजलियां पर्व पुरानी दुश्मनी भुला देने और मेल मिलाप बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है लेकिन समय की बदलते तकाजे के कारण यह पर्व अपनी पहचान खोता जा रहा है। पन्ना-अमानगंज क्षेत्र में कई जगह कलियों की बोनी की जाती है। पन्ना आमानगंज सहित समूचे अंचल में हर्ष उल्लाश के साथ यह कजलियो पर्व आयोजन किया जाता है।
