रहीम शेरानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ जिला के मेघनगर विकासखंड के रंभापुर, मदरानी, मांडली, पीपल खूंटा, झायड़ा, अगराल, आदि क्षेत्रों में मानसून की आमद से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और वह खेतों में हल चला रहे हैं। काम की तलाश में गुजरात, राजस्थान व अन्य राज्यों में गए वनवासी अब बारिश की शुरुआत के कारण घरों की और लौटना शुरू हो गए हैं जिससे ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है। जिले में कृषकों की आजीविका का साधन खेती ही है और खेती पूर्णतः मानसून पर निर्भर है। भारतीय कृषि को मानसून का जुआ भी कहा जाता है, उक्त जुए में अपनी मेहनत व पसीने के परीक्षम का दाव लगाने हेतु कृषक तत्पर है, बाजार में भी बरसाती छाता आदि की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है।
खेतों में किसानों की आवाजाही बढ़ी है तो राजस्व कार्यालय व तहसील में भी जमीनी खेती संबंधी रिकॉर्ड हेतु ग्रामीणों की पटवारियों से पूछ परख बढ़ी है। कभी भी निरंतर अच्छी बारिश की कामना हेतु भगवान से प्रार्थना भी की जा रही है।
वर्षा की शुरुआत होने से गर्मी से थोड़ी राहत मिली है और पशु पक्षियों के लिए भी पानी से गड्ढे भर जाने से राहत है। मानसून की सक्रियता व किसानों की खेतों में सजगता से वातावरण परिवर्तनशील लग रहा है। धरती भी अब हरियाली की चादर ओढ़े नजर आने लगी है।
