संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

ठाठीपुर मुरार ग्वालियर स्थित कबीर आश्रम पर समाजसेवी संस्था गोपाल किरण समाज सेवी संस्था के तत्वाधान में रविवार को बाल पांचयत का आयोजन किया गया। सभा में नंद किशोर समाचार के संपादक व समाज सेवी दीपक कुमार दिलेर मुख्यअतिथि व गोपाल किरण समाज सेवी संस्था (GKSSS) के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
इस मौके पर बच्चों को संबोधित करते हुए पत्रकार दीपक दिलेर ने बच्चों की कई जीवन उपयोगी बातें बताई। श्री दिलेर ने कहा कि बच्चों को जीवन में कभी झूठ नहीं बोलना और किसी की चुगली इत्यादि कभी नहीं करना चाहिए। श्री दिलेर ने बच्चों को अपने माता पिता की आज्ञाकारी होना जैसी अनेक बातों की घुट्टी पिलाई।कार्यक्रम समापन से पूर्व उपस्थित बच्चो को लेखन सामग्री किट वितरण किया गया। वच्चों को बच्चों की सुरक्षा हेतु चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098, महिला हेल्प लाइन नंबर, 1091, पुलिस कंट्रोल नंबर 100 की जानकारी दी गई।बच्चों को उनके अधिकार के बारे में विस्तार से बताया गया एवं बच्चों को इंट्रोडक्शन के बारे में ये बताया गया कि परिचय का क्या महत्व होता है इसके अन्य महत्वपूर्व विषयों पर चर्चा की गई।

श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने संबोधित करते हुये कहा कि हमें जिस स्वभाव के साथ जन्म देते है वो प्रायः अपरिवर्तित रहता है किन्तु अपनी आदतों के जन्मदाता हम स्वयं होते हैं जो हमें दोषपूर्ण जीवन शैली जीने से अनचाहे प्राप्त हो जातीं हैं फिर भी आदतों को परिवर्तित करना हमारे वश में होता है। बहुधा हम अपने स्वभाव की तो परवाह करते हैं अपितु आदतों के प्रति लापरवाह होते हैं जबकि हमारे जीवन की अधिकतर असफलताओं का कारण हमारा स्वभाव नहीं बल्कि हमारी आदतें होती हैं। जीवन में सफल होने के लिए अच्छी आदत और सच्ची प्राथना दोनों ही असरकारी होते हैं।
जीवन में जब श्रम से बचने और मौज़ करने की इच्छाएं तीव्र हो जाती हैं तो उचित – अनुचित का विचार त्याग कर हम कुमार्ग पर चलने लगते हैं जिससे हमारे स्वयं का ही नहीं समस्त परिवार और समाज के पतन की शुरुआत हो जाती है। भोग विलास पूर्ण आकांक्षाओं से ही हमारी अतृप्ति अंतहीन हो जाती और हमारा मन अधिक सुख – सुविधाओं की मांग करने लगता है, यही स्वार्थ और अदूरदर्शिता पूर्ण प्रक्रिया हमारे बहुमूल्य मनुष्य जीवन को व्यर्थ कर देती है। जीवन में श्रम आधारित समानुपाती प्रगति की प्रार्थना करते रहना चाहिए।
हमारा मन कोरे कागज या फोटोग्राफी की प्लेट की तरह है जो परिस्थितियॉं, घटनाएँ एवँ विचारणाएँ सामने आती रहती हैं उन्हीं का प्रभाव उस पर अंकित होता चला है और मनोभूमि वैसी ही बन जाती है हम स्वभावत: न तो बुद्धिमान हैं और न मूर्ख, न भले हैं, न बुरे, वस्तुत: हम बहुत ही संवेदनशील रचना है , हम अपने समीपवर्ती प्रभाव को ग्रहण कर जैसा वातावरण हमारे मस्तिष्क के सामने छाया रहता है उसी ढाँचे में ढलने लगते..हमारी यह विशेषता परिस्थितियों की चपेट में आकर कभी अध:पतन का कारण बनती है – कभी उत्थान का. प्रयत्न करके स्वयं को प्रतिकूल प्रभाव से बचाते रहना ही सफल जीवन की कुंजी है।
भारत सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सारी योजनाएं हैं लेकिन जानकारी के अभाव में हमारा समाज इन सभी योजनाओं से वंचित रह जाता है. हमारी कोशिश यही रहनी चाहिए कि हम ऐसी योजनाओं को खोजें और अपने समाज तक जानकारी को पहुंचाएं।
बुद्ध का मार्ग, धम्म ही समाज को सदाचारी, नीतिमान बना सकता है।
यदि बचपन से हर व्यक्ति पर यह संस्कार पड़े तो समाज नीतिमान बन सकता है। समाज मे स्वतंत्रता समता बन्धुत्व न्याय की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
इस वाल पंचायत का प्रारंभ हर रविवार को किया जा रहा है जिसका शुभारभ जहाँआरा (cc)वीडियो वोलिटियर्स किया गया था । कार्यक्रम का समापन राधा सैनी ने किया।
