ओवैस सिद्दीकी, ब्यूरो चीफ, अकोला (महाराष्ट्र), NIT:

हर साल की तरह इस साल भी अकोला जेल प्रशासन द्वारा जेल में मुस्लिम कैदियों के लिए रमज़ान के सेहरी, अफ्तारी के तैयारी पूरी हो चुकी है। जेल अधीक्षक दयानंद सैराटे के मार्गदर्शन में कैदियों को पूरे 30 दिन सहरी एवं अफ्तार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अंडर ट्रायल के कुछ कैदी न्याय की प्रतीक्षा में होते हैं, न्याय प्रकिया में फौरन न्याय नहीं दे सकते इस लिए समाज व परिवार से दूर उन्हें जेल में कैद रखा जाता है, उन सभी कैदियों के धर्म के मुताबिक त्योहार जेल में ही मनाए जाते हैं तो दूसरी ओर न्यायालय के आदेश पर सज़ा काट रहे कैदी अपने परिवार से दूर जेल में अपनी जिंदगी बिताते हैं जहां न उनका कोई परिचित होता है और न ही कोई साथी, जेल की ऊंची दीवारें एवं खामोशी ही उनकी अलग दुनिया होती है, ऐसे में दो शब्द प्रोत्साहन के उनके लिए काफी अहमियत रखते हैं, जेल प्रशासन की उक्त सर्व धर्म संभाव की भावना काबिल-ए-तारीफ है।
मुस्लिम समाज के कैदियों के लिये रमज़ान में लगने वाली सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य जेल प्रशासन व अकोला के दारुल क़ज़ा द्वारा किया जाता है। इस साल अकोला जेल में कुल 35 कैदी रोज़ा रख रहे हैं जिसमें करीब 30 पुरुष एवं 5 महिलाओं का समावेश है। जेल प्रशासन द्वारा इन रोजेदारों का सम्पूर्ण रूप से ख्याल रखा जा रहा है।
