फराज़ अंसारी, ब्यूरो चीफ, बहराइच (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की भारत-नेपाल सीमा बसा रुपईडीहा स्मैक बिक्री का ट्रांजिट पॉइंट बन गया था। बीते एक साल से यहाँ स्मैक की दुकान इस तरह से सजती थीं मानो जैसे इन्हें बेचने का लाइसेंस प्राप्त हो गया हो। इस कदर स्मैक बेंचे जाने से एक साल में करीब एक दर्जन लोगों की मौतें भी हो गई है जैसा कि सूत्र बताते हैं। रुपईडीहा कस्बे का नईबस्ती, मुस्लिम बाग, बरतानवा, भठ्ठा मोहल्ला, चकिया मोड़ चौराहा तथा कस्बे के पश्चिम पचपकरी, रंजितबोझा, पोखरा आदि स्थान स्मैक बिक्री का हब बन चुका था। स्मैक के बड़े कारोबारी स्मैक की पुड़िया बेंचने के लिए अक्सर बच्चों व महिलाओं का सहारा लेते थे और बड़ी डीलिंग को वे स्वयं ही करते थे। कई बार कस्बे के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मो0 जुबेर अहमद फारूकी, भाजपा नेता रमेश अमलानी व डॉ0 सनत कुमार शर्मा ने थानों की मीटिंगों में इसकी रोक थाम के लिए आवाज़ उठाते रहते थे। मगर रुपईडीहा थाने के तत्कालीन प्रभारियों ने इस ओर कभी कोई कदम नहीं उठाया। उठाते ही क्यों? आज आप जान लीजिए चूंकि पैसे की चकाचौंध की वजह से इस कदर उनकी आंखों पर काली पट्टी बंधी थी कि वह किसी की सुनने को तैयार नहीं रहते थे। उनका सिर्फ एक ही मक़सद होता था “लूट सको तो लूट कहीं दुबारा ऐसा पल आये न”, इसी की तर्ज़ पर इस आदर्श थाने में कार्य किये जाते थे। थाने के सिपाही अगर कभी कभार स्मैक के कारोबारियों को पकड़ भी लाते थे तो उनसे चंद सिक्के लेकर बेइज्जत बरी कर दिया जाता था जिससे क्षेत्र में दिन रात ड्यूटी करने वाले सिपाहियों का मनोबल तितर बितर हो जाता था।
मगर जब से रुपईडीहा थाना कोतवाली का प्रभार ईमानदार, कर्मठशील कुछ कर गुजरने का जज़्बा रखने वाले इंस्पेक्टर मधुप नाथ मिश्र को मिला है उसी समय से अपराधियों, तस्करों व रिश्वतखोरों की सामत आ गई है। अब आलम यह है कि नेपाल बॉर्डर से तस्करी के कार्य लगभग जड़ से निस्तोनाबूत हो गया है और तस्कर भारतीय इलाका छोड़कर नेपाल में भूमिगत हो गये हैं।
रुपईडीहा थाना प्रभारी मधुप नाथ मिश्र ने नेपाल बॉर्डर पर फैले स्मैक के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए कुछ थाने के तेज तर्रार सिपाहियों को इसका जिम्मा ऑपरेशन क्लीन के तहत सौंपा है। सिपाही सादे पोशाक में सभी स्मैक कारोबारियों की जन्म कुंडली खंगालने में लग गये हैं और ऑपरेशन क्लीन अपनी बुलंदियों की ओर बढ़ता जा रहा है। सिपाही और थाना प्रभारी निरीक्षक मधुप नाथ मिश्र बाज़ की तरह इन कारोबारियों पर नज़र जमाये हुए हैं। उसी का नतीजा हुआ कि 88 लाख रूपये की स्मैक की खेप के साथ अभी तीन दिन पहले पुलिस ने बादशाह नामक स्मैक के कारोबारी को मोटरसाइकल के साथ धर दबोचा है। तस्कर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है जिससे स्मैक बिक्री करने वाले कुनबों में हड़कंप मच गया है।
फिर दूसरे तस्कर एज़ाज़ को भी गुरूवार की रात करीब 12 बजे रोडवेज बस स्टैण्ड के पास से गिरफ्तार किया गया है और उसके कब्जे से पुलिस ने करीब 55 लाख रुपये की स्मैक बरामद करने में सफलता प्राप्त की है।
रुपईडीहा थाना प्रभारी मधुप नाथ मिश्र ने एनआईटी संवाददाता को बताया कि सूचना मिली कि नेपाल बॉर्डर 10 बजे बन्द हो जाने की वजह से एक स्मैक का सौदागर स्मैक की बड़ी खेप लेकर रुपईडीहा रोडवेज बस स्टेण्ड के अंदर बनी पीछे की बाउंड्री के पास बैठा है। सूचना मिलते ही प्रभारी ने एसएसबी की संयुक्त टीम लेकर रोडवेज बस स्टैण्ड पहुंच गये और देखा कि एक व्यक्ति बाउंड्री वाल के पास खड़ा है। पुलिस और एसएसबी के जवान उसके पास जैसे ही पहुंचे उतने में वह बाउंड्री वाल पर चढ़कर भागने का प्रयास करने लगा तभी जवानों ने उससे दौड़ा कर दबोच लिया और तालाशी ली तो उसके पास से 55 लाख रुपये की स्मैक बरामद हुई। पुलिस उसे पकड़ कर थाने ले आयी और पूछने पर उसने अपना नाम एज़ाज़ निवासी नई बस्ती बताया। पुलिस ने स्मैक को सीज कर एज़ाज़ को जेल भेज दिया है।
रुपईडीहा थाना प्रभारी निरीक्षक मधुप नाथ मिश्र ने बताया कि पूछताछ के दौरान पकड़े गये तस्कर एज़ाज़ ने बताया की वह यह स्मैक नेपाल ले जाने वाला था लेकिन देर रात हो जाने के कारण नेपाल नहीं जा सका था। इंस्पेक्टर ने यह भी बताया कि नेपाल बॉर्डर पर नशे के कारोबार को पनपने नहीं दिया जायेगा। पुलिस एक भी स्मैक के कारोबारी को नहीं बख्शेगी। ऑपरेशन क्लीन के तहत सभी स्मैक के कारोबारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाएगा।
