एक अप्रैल को मूर्ख दिवस के बजाय पौधारोपण दिवस रूप में मिले पहचान: डॉ अर्चना राठौर | New India Times

Edited by Pankaj Sharma, NIT:

लेखक: डॉ अर्चना राठौर अधिवक्ता

एक अप्रैल को मूर्ख दिवस के बजाय पौधारोपण दिवस रूप में मिले पहचान: डॉ अर्चना राठौर | New India Times

हिंदू कैलैंडर के अनुसार तो नववर्ष गुड़ी पड़वा से प्रारंभ होता है और एक अप्रैल से वित्तीय वर्ष प्रारंभ होता है। अब बड़ा प्रश्न ये है कि एक अप्रैल को किस रूप मनाया जाय, मूर्ख दिवस, नववर्ष या वित्तीय वर्ष। मेरा तो मानना है कि एक अप्रैल को वित्तीय वर्ष ही मानें तो अधिक उचित होगा, क्योंकि हमारा नववर्ष तो गुड़ी पड़वा से ही प्रारंभ होता है।एक अप्रैल के लिये जो किंवदंतियांं और कहानियों हैं वे विदेशियों ने अपने -अपने स्वार्थ के अनुसार प्रचलित कर दी हैं जिसका आज के युग में कोई अर्थ नहीं है क्योंकि आज के डिज़िटल युग में सभी बहुत समझदार हो गये हैं, कोई किसी को मूर्ख नहीं बना सकता। ग्लोबल वार्मिंग के समय में तो पर्यावरण संरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है, तो क्यों न हम एक अप्रैल को पौधारोपण दिवस के रूप में मनायें। मीडिया जिस बात को बार-बार कहता है वो बात सर्व विदित और सर्वमान्य हो जाती है तो आम जनता इसे इसी रूप में मनाने लगेगी और फिर सब मिलकर इसे शासकीय मुहर लगवाकर पौधारोपण दिवस घोषित करवायें। ये तो हमारे हाथ में है कि हम इस पवित्र दिवस से मूर्ख दिवस का ठप्पा कैसै हटायें। इस दिन लोगों को अप्रैल फूल बनाना और बोलना हमें बंंद करना होगा। ये अंग्रेजों की एक चाल थी जिसमें वे हमें उलझा कर चले गये क्योंकि उन्हें तो एक जनवरी से नया वर्ष शुरू करना था जिसे हम बड़ी धूमधाम से मनाते हैं और हमारे हिन्दू कैंलैंडर के अनुसार प्रारंभ होने वाले माह के प्रथम दिवस को हम मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं। हमारे देश के संस्कारों के प्रति ये एक शर्मसार करने वाला कार्य है। हमारे देश के गौरव और सम्मान के लिये हमें इस घृणित कार्य को किसी भी कीमत पर छोड़ना होगा। हमारे संस्कारों को बचाना भी हमारा प्रथम कर्तव्य है। प्रयास कभी निष्फल नहीं होते, इसके लिये बस जनजागरण की आवश्यकता है और जनजागरण का कार्य मीडिया से अच्छा और कौन कर सकता है। तो चलो आज से हम एक अप्रैल को पौधारोपण दिवस के रूप में मनायें। पौधा ही बड़ा होकर वृक्ष बनता है। आज से हम सब ये संकल्प करें कि हम एक अप्रैल को पौधारोपण दिवस ही बोलें और इसे उसी रूप में मनायें।

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