वाकडी कांड: आखिर कब खत्म होगा व्यवस्था का विवेक हीनता? क्या मजलूमों को मिल पायेगा इंसाफ??? | New India Times

नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

वाकडी कांड: आखिर कब खत्म होगा व्यवस्था का विवेक हीनता? क्या मजलूमों को मिल पायेगा इंसाफ??? | New India Times10 जुन 2018 को निजी बावडी मे नहाने पर गांव के दबंगों द्वारा कुछ अनुसूचित जाति के नाबालिग बच्चों को नंगा कर उन्हें बेरहमी से पीटते हुए उनकी नग्न अवस्था में बारात निकाली गई थी साथ ही आरोपियों में से किसी ने पिटाई का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। उस समय पूरे देश की मीडिया ने इस घटना को बडी गंभीरता से लिया था और राज्य के विभिन्न राजनितीक दलों तथा संगठनों के करीब दो दर्जन से अधिक नेता भरकस आश्वासनों के साथ सांत्वना देने के लिए पीड़ितों से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इसी बीच नेतागण वाकडी गांव कि संकरी गलियों में अपने गुणा -भाग का गणित बिठाने के जुगाड में जुट गए थे। उस समय नेताओं की तो जैसे बाढ सी आ गई थी। मिनटों में वाकडी भारत ही नहीं बल्की दुनिया में अपनी पहचान बना लिया था लेकिन आज जब साल बितने को आ रहा है तब उस घटना के पीड़ितों की ना तो कोई सुध लेने आ रहा है और ना ही किसी भी शख्स ने अपना वह आश्वासन पूरा किया है जो पीड़ित परीवार को तब सांत्वना के तौर पर दिया गया था। आज उन्हीं पीड़ित नाबालिगों के चाचा विनोद चाँदने को गायब कर दिया गया है और शायद हत्या भी कर दी गई है पीड़ित परिवार के आँसु पोछने तक के लिए कोई नेता अब तक आ नहीं सका है और ना ही मीडिया इस के लिए बिग कवरेज दे रहा है।

कुल मिलाकर माजरा बिल्कुल साफ़ है कि देश में लोकसभा के आम चुनावों का सीजन चल रहा है। वोटों के लिए नेतागण इस मुद्दे को शायद प्रचार में उछाल भी रहे होंगे लेकिन नेताओं की व्यस्तता और प्रशासन की मजबूरी के कारण पीड़ित विनोद के गुनहगारों के गिरफ्तारी की मांग को लेकर मातंग समाज के लोगों को सड़क पर उतर कर रास्ता रोको आंदोलन करना पड़ा तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। इस मामले के मुख्य साजीशकर्ता शेखर वाणी जो बीते 9 दिनों से फरार है के तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान पीड़ित के परीवार की महिलाओं व बच्चों को चिलचिलाती धुप में मृतक का फ़ोटो हाथ में लेकर न्याय की गुहार लगाते सडक पर लेटना पड़ा। जिसके बाद कोतवाली पहुंचने पर अनूविभागीय पुलिस अधिकारी ने चर्चा के दौरान आंदोलकों को शेखर की जल्द गिरफ्तारी कि हामी भरी।

जब न्याय ही न मिले तब इंसाफ के लिए संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक आंदोलन वाले अधिकार के सहारे आम आदमी सिस्टम को जगाने के लिए इस तरह की कोशीश जरुर कर सकता है बस शर्त इतनी है कि सिस्टम केवल सोया हुआ हो ना की डरा हुआ या मरा हुआ। राजनितीक आशिष से फ़लता फूलता रसुख, पैसा, सत्ता के नशे के चलते व्यवस्था के उच्चपदस्थ तत्वों की विवेकहीनता का वह खतरनाक विनोद भाव आखिर कब खत्म होगा और होगा भी तो तब तक कितनों को अपनी जान गंवाना पडेगी? यहि सवाल आज प्रत्येक बुद्धिजीवियों से पुछा जा रहा है। इसी को लेकर बहुजन विचारक श्री किशोर तायडे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वाकडी में दबंगों द्वारा विनोद के अपहरण तथा हत्या का किया गया अपराध बेहद गंभीर है। आपराधिक तत्व विशेष जाती समुदाय को ही निशाना बना रहे हैं, इसलिए अनू जाति – अनू जनजाति के सभी लोगों को अपनी आत्मरक्षा के लिए संवैधानीक तरीके से एकजुट होना जरुरी है। वाकडी में इससे पहले भी कई बार दबंगों द्वारा SC/ST पर अत्याचार की घटनाएं हुई हैं लेकिन इस बार जो हुआ है उससे मानवता शर्मसार हुयी है। अभी तो सरकार की ओर से वाकडी गांव को अतिशीघ्र अत्याचार प्रवण क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए।

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