अशफाक कायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

भारत मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ साथ जमाअत -ए-इस्लामी हिंद पर भी देश हित में अनेक दफा बैन लगने से साथ साथ अब दोनों संगठनों ने पर्दे के पीछे राजनीतिक दल बनाकर भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली का हिस्सा बनकर सत्ता के पावर की चाहत में कदम आगे बढा लिया है।
भारतीय मुस्लिम समुदाय के चंद लोगों की धार्मिक तंजीम जमात-ए-इस्लामी हिंद पहले सियासत से दूर फिर चुनावों में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर खास दलों की हिमायत का ऐलान करने के बाद पिछले कुछ साल पहले नेशनल वेल्फेयर पार्टी नामक अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर गिने चुने जगह चुनाव प्रणाली में भाग लिया पर उन चुनावों में उनके उम्मीदवारों की दाल नहीं गली। अनेक दफा तो जमाअत के लोगों ने मुस्लिम उम्मीदवार के खिलाफ अन्य दलों के उम्मीदवार को जिताने की अपील तक की जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय में जमाअत को बडे अजीब तौर पर देखा गया।
धर्मनिरपेक्षता का ढिंढोरा पीटने वाली जमात-ए-इस्लामी हिंद ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में सीकर से रालोपा के मुस्लिम उम्मीदवार सहित अनेक जगह के मुस्लिम उम्मीदवारों के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने की अपील ही जारी नहीं कि बल्कि वोट तक मांगे जिसमें सीकर से रालोपा के मुस्लिम उम्मीदवार तो चुनाव हार गये लेकिन फिर भी नगर से बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीत गये।
जमात-ए-इस्लामी के भारतीय स्तर के अहम ओहदेदार व उनकी राजनीतिक पार्टी “नेशनल वेल्फेयर पार्टी” के अध्यक्ष सैय्यद कासिम रसूल इलियास कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ पक्षिमी बंगाल के 71 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाताओं वाली जांगीपूर-मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे है। जहां से प्राप्त समाचारों के अनुसार कासिम रसूल इलियास की जीत की सम्भावना दूर दूर तक नजर नही आती है लेकिन इलियास के वोट काटने से वहां अगर भाजपा उम्मीदवार जीतता है तो यह उस क्षेत्र में एक नया इतिहास लिखा जायेगा।
दिल्ली की जवाहर लाल विश्वविद्यालय के वामपंथ मूवमेंट से निकलने वाले चर्चित छात्र नेता उमर खालिद के पिता व महाराष्ट्र राज्य के रहने वाले कासिम रसूल इलियास ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिये इतनी दूर जाकर मुस्लिम बहुल जांगीपुर लोकसभा क्षेत्र को ही क्यों चुना यह तो वो खुद जानें या उनकी पार्टी जाने पर उनके वहां चुनाव लड़ने से मतों का बंटवारा होकर सीधा सीधा उन्हीं की मुताबिक धर्मनिरपेक्ष कहलाने वाली कांग्रेस को नुकसान होना तय है।
