सरकारी जमीन का नामांतरण होने से सैकड़ों अवैध अतिक्रमण कारी प्रसन्न | New India Times

रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

सरकारी जमीन का नामांतरण होने से सैकड़ों अवैध अतिक्रमण कारी प्रसन्न | New India Times

मेघनगर में दिनांक 21./1 /2019 को स्थानीय तहसीलदार ने नगर के बीचों बीच सर्वे नंबर 557 के मंडी नजूल की शासकीय दो भूखंडों का नामांतरण कर दिया है और साथ ही सर्वे नंबर 485 दशहरा मैदान के कुछ भूखंडों का भी प्रकरण आदेश के लिए लगा हुआ है। ज्ञात हो कि नगर के जागरूक नागरिकों एवं पत्रकारों ने हो चुके निर्णय के प्रति आक्रोश व्यक्त किया तथा पत्रकारों ने इस संबंध में शासन व प्रशासन को भी अवगत कराया कि मंडी नजूल की शासकीय भूमि को षड्यंत्र पूर्वक हड़पने वालों के विरुद्ध जांच कर कठोर कार्रवाई करें। उधर नगर के नजुल के सर्वे नंबर 485, 490, 491, 495, 525, 526, 528 533, 557 पर बसे सैकड़ों अवैध कब्जे धारी भवन गोदाम मकान दुकान वाले प्रसन्न हो रहे हैं, वहीं शासकीय जमीनों पर कब्जा धारी चंद टुकड़े डालकर जमीनों को पंचायत में दर्ज कराकर पंचायत के प्रमाण पत्र आधारित कब्जाधारी धनाध्य लोग अब नामांतरण कराने के जुगाड़ दलालों के माध्यम से कर रहे हैं। बताया जाता है कि किसी गुप्ता परिवार की फर्जी रजिस्ट्री जिसमें कहीं सर्वे नंबर का उल्लेख नहीं है और ना ही चतुर सीमाओं का मिलान होता है जैसे सैकड़ों रजिस्ट्री धारी तहसीलदार राजेश के रहते अपना नामांतरण कराने की जुगाड़ में लगे हुए हैं। इसी तरह की फर्जी रजिस्ट्री वालों का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय की डिग्री के प्रकाश में तहसीलदार ने जो निर्णय दिया है उसी आधार पर एक नेचर की सभी रजिस्ट्री होने से हमारे भी नामांतरण न्याय हित में होने की संभावना है। स्थानीय बस स्टैंड पर लगभग 24 भूखंडों की रजिस्ट्री है, रजिस्ट्री धारकों ने अपनी-अपनी रजिस्ट्रीयों की धूल अब झटक दी है और वह इस बात से खुश है कि कोई ऐसा बंदा आया है जो ले देकर कम से कम हमें भूमि स्वामी तो बना देगा। यहां ऐसे लोग भी है जिनके आलीशान बिल्डिंग रजिस्ट्री के माध्यम से बैंक में बंधक रखी हैं व लाखों रुपए का ऋण है वह भी इस बात के लिए प्रश्न है कि नामांतरण होने से हमारा मालिकाना हक तो स्थापित हो जाएगा। इस नामांतरण की घटना ने एक बड़े वर्गों को जो गरीब व मध्यम वर्गीय है उसे झकझोर कर रख दिया है कि सरकारी जमीन पर धन बल के माध्यम से कब्जा करने वालों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होती ऐसी स्थिति में जो लोग अपने रेन बसेरे के लिए एक खोली की जमीन मांगने पर यहाँ नहीं मिलती ऐसे लोगों को कितनी मशक्कत करना पड़ती है जबकि सरकार बार-बार यह घोषित करती है कि गरीब को मकान उपलब्ध कराएंगे परंतु यहां तो सरकार की एजेंसी राजस्व प्रशासन ही जमीनों के दल्ले भु माफियाओं को शासकीय जमीनें परोसने लगी हैं।

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