लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार-जीत का गणित बिगाड़ सकते हैं बुजुर्ग नेता रोहिदास पाटील, धुले-नंदुरबार लोकसभा सीट से युवाओं को प्राथमिकता देने की चल रही है मांग | New India Times

अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार-जीत का गणित बिगाड़ सकते हैं बुजुर्ग नेता रोहिदास पाटील, धुले-नंदुरबार लोकसभा सीट से युवाओं को प्राथमिकता देने की चल रही है मांग | New India Times

आगामी लोकसभा चुनाव में धुले और नंदुरबार लोकसभा सीट पर जहां युवाओं को मौका देने की मांग जोर पकड़ रही वहीं कुछ बुजुर्ग नेता कांग्रेस का खेल बिगाड़ रहे हैं।

बताया जाता है कि मतदाताओं में एकजुटता को तोड़ने के लिए कांग्रेसी विधायक कुणाल पाटील अपने 80 वर्षीय पिता के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं इसके बावजूद जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी आखिरी उपाय के रूप में नासिक जिले के बागनाथ के लोकप्रिय डॉक्टर तुषार सेलावे के बढ़ते हुए कदम को रोकने के लिए युवा उम्मीदवारों के टिकट काट सकती है और अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस के बुजुर्ग चेहरे यकीनन घातक बन सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस का उम्मीदवार जितवा कर लाना है तो अब कांग्रेस को इन बुजुर्ग चेहरों के बजाए नए चेहरों को मौका देना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार-जीत का गणित बिगाड़ सकते हैं बुजुर्ग नेता रोहिदास पाटील, धुले-नंदुरबार लोकसभा सीट से युवाओं को प्राथमिकता देने की चल रही है मांग | New India Times

इस बार धुलिया लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री रोहिदास पाटील भी इच्छुक उम्मीदवार बताये जा रहे हैं। इसी तरह से नाशिक ज़िले के कद्दावर कांग्रेसी नेता तुषार शेवाले भी उम्मीदवारी का
दावा ठोक रहे हैं। तत्कालीन युवा प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने देश की राजनीतिक गलियारों में युवाओं को आगे बढ़ने को कहा था और उन्होंने प्रयास भी किया था लेकिन धुलिया लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी के अंदर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पूर्व मंत्री रोहिदास पाटील की आयु करीब अस्सी साल के आसपास है तो वही पर डॉक्टर तुषार शेवाले युवा पीढ़ी से उच्च शिक्षित व्यक्ति हैं। 1885 की पुरानी राजनीतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देश पर सब से अधिक समय तक राज करने का इतिहास रचा लेकिन बदलते मौसम राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस ने भी अपने आज तक के राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। ऐसे कई सवाल जिले में भाजपा के बढ़ते प्रभाव से उपस्थित हो रहे हैं। बीच के काल में रोहिदास पाटील और अमरेश पटेल के अपने निजी लाभ के कारण धुलिया तथा नंदुरबार लोकसभा सीटों से हाथ धोना पड़ा था। इन की आपसी विवाद में कब कांग्रेस का क़िला खान्देश में ढहा गया इन्हें पता ही नहीं चला।
दरअसल ज़िले में कांग्रेस दूसरी लोकसभा सीट हासिल करने और सत्ता में वापसी करने के लिए कांग्रेसी बुजुर्ग नेताओं की चाहत दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक धुलिया लोकसभा सीट को लेकर खासा चिंतित है। लगातार आ रही सर्वे रिपोर्ट और फीडबैक में कोई सुधार नहीं आ रहा है जबकि धुलिया लोकसभा क्षेत्र विशेष तौर पर कांग्रेस का गढ़ माना जाता है लेकिन पिछले दो दशकों से इस क़िले में बीजेपी ने सेंध लगा दी है। कांग्रेस के प्रति हर स्तर पर लोगों की नाराजगी फैली हुई है। देश भर में तथा ज़िले में कांग्रेस ने एक सिंहासन सत्ता का सुख भोगा है लेकिन आम समस्या ज़िले का विकास जस का तस धरा हुआ है। तत्कालीन सरकार ने दोनों हाथों से देने में संकोच नहीं किया इसके बावजूद भी खान्देश में धुलिया को विकसित नहीं किया गया जिसके कारण इन बुर्जुगों को टिकट मिलने की संभावित संभावनाओं से लोकसभा क्षेत्र में संतुष्टि का जो माहौल बनना था वह नहीं बन पा रहा है। बहरहाल, पार्टी विरोधी मानसिकता को तोडऩे के लिए अब आखिरी अस्त्र पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि युवाओं को भी सियासत में मौका मिले। इस पर भी विचार विमर्श किया जाएगा तो धुलिया लोकसभा क्षेत्र की सीट पर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित हो सकती है जिसमें मालेगाँव से संबंध रखने वाले रसूखदार एक नहीं तीन तीन युवा चहरे हैं। युवा पीढ़ी कांग्रेस पार्टी का आखिरी अस्त्र होगा जिसके सहारे वह ज़िले में दूसरी बार हार के बाद जीत का मंसूबा पूरा कर सकती है।

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