मकसूद अली, ब्यूरो चीफ यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

स्थानीय बस स्थानक के सामने इंडियन ऑईल का सेंट्रल एजंसी द्वारा चलाए जाने वाला भानुदास सेठ का पेट्रोल पंप है, यहाँ 6 फरवरी की रात 10 बजे के दौरान कुणाल गोपाल चौधरी नामक युवक अपने वाहन में पेट्रोल भरने के लिए आया, उसके पास नगद राशि ना होने से उसने अपने एटीएम कार्ड से यहां 50 रूपये स्वीप किए, लेकिन यहां पेट्रोल वितरीत कर रहे व्यक्ती ने 50 रूपये का पेट्रोल देने से साफ मना कर दिया तो युवक ने पूछा कि जब 50 रुपये का पेट्रोल देना ही नही था तो 50 रूपये स्वीप क्यों किए? युवक ने कहा कि बैंक या कोई भी फर्म का ऐसा नियम नहीं है कि 50 रूपये का पेमेंट डिजीटल ना करें। जब इसकी शिकायत पेट्रोल पंप के मालीक भानुदास सेठ से की तो उन्होंने भी अपने कर्मचारियों की बात सही ठहरा।
अब सवाल यह है कि एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को डिजिटल एवं कैशलेस व्यवहार को प्रोत्साहित कर रहे हैं तो फिर जिम्मेदार एजेंसियां कैशलेस व्यवहार के लिए मना क्यों कर रही हैं? भानुदास सेठ का कैशलेस व्यवहार से इंकार करने की बात लोगों के समझ में नहीं आ रही है। कुणाल को जल्दी अपने काम पर जाना था इसलिए पेट्रोल देने की बिनंती की लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। उन्हें हुई परेशानी की शिकायत आला अधिकारियों से करने की बात कुणाल ने बताई है।
